शाबर मंत्र, तंत्र यंत्र साधना, गुरु गोरखनाथ परंपरा के प्राचीन सिद्ध मंत्र, वशीकरण, सुरक्षा मंत्र, बाधा निवारण मंत्र और शक्तिशाली लोकपरंपरा आधारित साधनाओं का संपूर्ण ज्ञान। यहाँ आप सरल मंत्र विधि, प्रयोग, तांत्रिक माध्यम और आध्यात्मिक जानकारी आसानी से सीख सकते हैं।

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मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

Bhairav Baba Aarchan Mukti Upay | Safe & Powerful Remedies


 भैरव बाबा की अड़चन-मुक्ति की सुरक्षित और पारंपरिक उपासना-विधि


यह विधि पूरी तरह सुरक्षित, सात्विक और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित भैरव उपासना पर आधारित है।
आप इसे घर पर भी कर सकते हैं—कोई हानिकारक या तांत्रिक क्रिया नहीं है।
⭐ 1. सरल भैरव पूजा (अड़चन हटाने के लिए)
समय: सुबह या रात्रि 9–12 बजे के बीच
स्थान: घर के पूजाघर में या किसी भैरव मंदिर में


Bhairav Baba Aarchan Mukti Upay | Safe & Powerful Remedies
Bhairav Baba Aarchan Mukti Upay | Safe & Powerful Remedies


विधि:

दीपक (सरसो/तिल का तेल) जलाएँ
भैरव बाबा के चित्र/प्रतिमा पर लाल फूल चढ़ाएँ
थोड़ा सा जल + रोली + धूप अर्पित करें
ध्यान शांत करके केवल मनोकामना करें
नीचे दिया हुआ भैरव अड़चन-निवारक मंत्र 108 बार जपें

2. अड़चन-निवारक ‘भैरव मंत्र’ (सुरक्षित मंत्र)
मंत्र:

“ॐ ह्रीं कालभैरवाय नमः”

यह मंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और
मानसिक रुकावट, डर, नेगेटिविटी, काम में बाधा, मानसिक भ्रम जैसी अड़चनों को दूर करने में मदद करता है।

जाप नियम:
रोज़ 11, 21 या 108 बार
लाल आसन पर बैठकर
केवल शुद्ध मन से

 3. भैरव बाबा का ‘सरल अड़चन-मुक्ति उपाय’ (खाना पकाने जितना आसान)

यह किसी भी प्रकार का टोटका नहीं है—बस आध्यात्मिक उपाय।

विधि:

शनिवार या रविवार की सुबह
किसी चौराहे पर कुत्ते को 2 रोटी + थोड़ा गुड़ खिलाएँ
यह भैरव बाबा को प्रसन्न करने का पारंपरिक साधन माना जाता है
इससे रास्ते की अड़चनें, काम में रुकावट, डर और अनहोनी दूर होती है




 4. भैरव बाबा का “दूध-दीपक उपाय” (पूरी तरह सुरक्षित)

एक कटोरी में थोड़ा गाय का दूध लें
उसमें 4 बूंद सरसों तेल डालें
दीपक बनाकर भैरव चित्र के सामने जलाएँ
मन में अड़चन दूर होने की प्रार्थना करें

⚠️ कोई तंत्र-विधि नहीं, सिर्फ आध्यात्मिक उपाय है।

बुधवार, 16 फ़रवरी 2022

Kiye Karaya ka Dosh

 

 Kiye Karaya ka Dosh - किये कराये का दोष  


जादू टोना और  बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए मजबूत मंत्र का उपयोग किया जाता है। जादू टोना बहुत ही शक्तिशाली  काला जादू होता  है और यह  बहुत  दर्दनाक समस्याओं को पैदा करता है और प्रदान करता है, इसीलिए इस प्रकार की जादू टोने की बुरी समस्याओं को दूर करने के लिए इस मंत्र का उपयोग किया जाता है।
Remove Witchcraft Bad Problems – Kiye Karaya ka Dosh - किये कराये का दोष
Kiye Karaya ka Dosh - किये कराये का दोष  

॥ मंत्र ॥

ॐ रुनुं इ झुनूं।
अमृत मारातं देवी औरंपर तारा।
वीर मान्यो वीर तोन्यो।
हाँक डांग महि मथन करण जोग।
भोग जोग घर छत्तीस नछत्र।
धर सर्प पति वासुकी।
धर सप्त ब्रहाण्डे पति ब्रह्मा के छाया धौ।
देवी धौ।  देवता धौ।
डायनी धौ।  गुरुरानी धौ।
भूत धौ।  प्रेत धौ।
धर धर माँ चंडी।
बीज करवाल षंडी।
धौर्य वा गुटिनां य दादद्ली ईमान को।
चलंते केके जाते।
औ रे वीर भैरवी काम रूप काम चंडी।
बीजे चल षंडी।
चोदीगे एरलं देवी।
वसीला की मांडी चंडी।
चन्द्र चमकीले।
सूर्य टरील।
एरल देवी हरा हरा परी।
सुखिला कीट रे जीवो।
परानंदरी वाहंते खप्पर।
दाहिने हाथ छुरी।
एरला देवी अवतारी।
डायिनी बाँधौ।
चुरइली बाँधौ।
गुनी बाँधूँ।
मोरा बाँधूँ।
मसानी बाँधूँ।
गुनिया ना सुनी आवे गरनि।
आं बुलावे रांडे।
माला डाण्डे।
जीवता डांडे।
हँसै खेलै मारिवलं झारो वलिते ते।
ते कामरु काम चंडी कोटिश आज्ञा।




विधि: शनिवार की रात को 21 माला जप कर मंत्र को सिद्ध कर लो।  फिर जब भी जरूरत हो मन्त्र का उच्चारण करते हुए 7 बार झाड़ा लगा दो मोरपंख से। किये कराया का दोष या रोगी पूर्णत  स्वस्थ हो जाएगा।


बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

pret tatv pret yoni

प्रेत तत्व के बारे में प्रेत योनि

आज हम प्रेत तत्व के बारे में बात करेंगे ! अगर आपका कोई अपना प्रेत योनि को हुआ है तो इस लेख को पूरा पढ़े।
मेरा ये दावा है कि अगर आप मेरे इस लेख को ध्यान पूर्वक पढ़ेंगे तो आपको अपनी समस्या का समाधान अवश्य मिलेगा।
 
pret tatv pret yoni
pret tatv pret yoni

 

किसी भी जीव के पूर्व कर्म ही उसकी वर्तमान दशा का निर्धारिकर्ण करते हैं।पूर्व के संचित कर्म से मनुष्य अपनी वर्तमान दशा को भोगता है ये बात तो स्पष्ट है। पूरे जीवन में जो लोग धर्म और राम को कोसते है लेकिन कभी वो अपने मनसा वांचा कर्म गत कार्यों को अनदेखा करते रहते हैं और जिस राम को वे लोग जीवित रहते हुए कोसते है अन्तोगत्वा वही श्री राम का नाम उनके लिए इस संसार रूपी सागर से पार करने का साधन बनता है मनुष्य इतना कृतघ्न है कि अपने अहम के सामने अपने अंत को भी भूल जाता है।
 
(मुख्य दो कारणों के कारण ही जीव प्राप्त होता है)
1.जब किसी जीव का कोई संकल्प अधूरा या इच्छा अधूरी रह जाए।
2.जिस आदमी का अंतिम संस्कार अधूरी विधि से हो या ना हो तो वो भी प्रेतयोनि को प्राप्त करता है।
धर्म की दृष्टि से अगर देखा जयें तो ये एक कटुसत्य है एक आधुनिकीकरण से मनुष्यों को जितना लाभ प्राप्त हुआ है तो उतना ही संस्कृति का विनाश भी हुआ है आज का दौर ऐसा है कि आज तो आदमी को बिजली के यंत्र में जलाया जाने लगा है पर्यावरण की दृष्टि से ये एक अच्छी बात हो सकती है लेकिन अगर शास्त्र मर्यादा की बात की जायें तो
कपालक्रिया ना होने के कारण मृतक का प्रेतयोनि में जाना लगभग तय होता है और ये जो अंतिम संस्कार की विधि है वह किसी भी तरीके से पूरी नहीं मानी जा सकती आप फिर प्रेत बनना तो शत प्रतिशत तय हो जाता है।
 
कुछ महीनों पहले मुझे आसाम जाने का मौका मिला अंतिम संस्कार क्रिया का भयानक रूप देखने को मिला यहां रात्रि में भी चिता जला दी जाती है आधी रात को भी ये सभ कुछ मैन अपनी आँखों से देखा कोई मर्यादा नही जो व्यक्ति एक परिवार का एक अभिन्न हिस्सा था आज परिवार जन उसको बिना शास्त्रिक मर्यादा के एक नदी के किनारे आधे जले हुए शव को लाठियों से पीट पीट कर उसकी जली हुई राख को झाड़ रहे थे उसे 2 से 3 बार ऐसे ही लाठी मार मार कर झाड़ा गया अंत में तेज पानी के प्रेशर से नदी में प्रवाहित कर दिया गया अब जिस मृतक की क्रिया ही गलत हुई वो कैसे प्रेत योनि से मुक्त होगा ।
 
यह जीव तब तक इस संसार में प्रेतयोनि धारण करके अपने परिवार और घर में ही विचरण करते रहते हैं और परिवार को नाना प्रकार से पीड़ित करते रहते हैं जब तक इनकी आयु पूरी नहीं होती क्योंकि गरुड़ पुराण के मत अनुसार कलयुग में मनुष्य का जीवन काल 120 वर्ष का है लेकिन आजकल के जीवन शैली के अनुरूप मनुष्य का जीवन मात्र 50-60 सालों तक ही सिमट गया है बड़ी विडंबना की बात है तो आज हम बात करेंगे कि किस प्रकार यह प्रेत तत्व को मृतक जीव प्राप्त होता है
और किस प्रकार से इस का निदान संभव है । और इस विषय के ऊपर विस्तृत जानकारी दी जाएगी अंत में आपको इसके निराकरण और कुछ उपाय भी बताए जाएंगे कि किस प्रकार प्रेतत्व से जीव को निवृत्त कराया जा सकता है
*(प्रेत पीड़ा के कारण ये समस्याएं होने लगती हैं)***
1.जब स्त्रियों का ऋतुकाल निष्फ़ल हो जाता है.
2.कितनी भी दवा इलाज से वंश की वृद्धि नहीं होती,
3.अल्पायु में किसी परिजन की अकास्मिक मृत्यु हो जाती है.
4.अच्छे भले में विचित्र सी कोई मानसिक या शारिरिक परेशानी महसूस होने लगे तो उसे प्रेत पीडा मानना चाहिए.
5.पीड़ित की अचानक ही आजीविका छिन जाती है,
6.पीड़ित व्यक्ति की प्रतिष्ठा नष्ट हो जाती है.
7.एकाएक घर में आग लग जाए,बार बार घर में सांप निकलने लगे।
8.घर में नित्य प्रति कलह रहने लगे,
9.बहुत समय से जमा-जमाया व्यापार एकदम नष्ट हो जाय,
10.हर तरफ़ से हानि हो,
11.अच्छी वर्षा होने पर भी कृषि नष्ट हो जाय,या झाड़ खत्म हो जयें फसल में रोग हो जाए।
12.स्त्री अनुकूल न रहे कलेशी हो या बिना किसी बात के मुकदमा कर दे।
13.घर की मुख्य या जवान स्त्री का जिस्म अक्सर भारी रहना खासकर कंधे,या पीठ पर दर्द या वज़न का रहना कईबार सवारी जैसे हालात हो जाते है और बहुत ही ज्यादा गंदे सपने लगातार आना।
14.घर के बच्चों का अक्सर बीमार रहने लगे उनकी शिक्षा और संस्कार बाधित हो तो ये सामान्य लक्षण हैं प्रेत बाधा के।यदि ऐसी पीड़ा घर में होने लगे तो पितरों को प्रेतत्व से मुक्ति कराने के विशेष प्रयास करने चाहिए. मृतक का मृत्यु के समय दशगात्र पिंडदान और वृषोत्सर्ग कराना परम आवश्यक होता है. यह कार्य कार्तिक की पूर्णिमा या आश्विन मास के मध्यकाल में करते हैं. यह संस्कार रेवती नक्षत्र से युक्त पुण्य तिथि में भी कर सकते हैं।
 
अब बात करेंगे इस समस्या के उपचार की रोग के अनुपात में औषधि देनी होगी है तब ही किए गए उपचार से लाभ मिलता है वरना नही सामान्य बात है कि तराज़ू के एक पलड़े मैं यदि 1 किलोग्राम वज़न है तो दूसरे में भी 1 किलोग्राम ही रखना पड़ेगा जब हम लोग कोई पाप करते है तो हमारी बुद्धि काम नहीं करती और एक बहुत छोटे से पाप से भी मनुष्य को पूरे जीवन भरकष्ट भोगना पड़ सकता है आप चाहे लाखो रूपए लगाकर कितना भी बड़ा अनुष्ठान करवा लो तो भी बिना श्रद्धा के सभ कुछ बेकार है ।
 
***।उपचार।***
1.माता पिता की सेवा करें और उन्हें हमेशा खुश रखें।
2.पित्र संहिता का पाठ करवाएं।
3.पित्र गायित्री से भी बहुत आराम मिलता है।
4.पित्र पक्ष में श्राद्ध कर्म जरूर करें।और पितृपक्ष में संयम से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें और मांसाहार से दूर रहें।
5.किसी भी जानकर या संबधी की मृत्यु होने पर पिंडदान और गरुड़पुराण का पाठ वअवश्य करवाएं।
6.नारायण बलि का यज्ञ विधिवत रूप से करवाने से 7.पितृदोष दूर होता है और मृतक जनों को प्रेतयोनि से मुक्ति मिलती है।
8.शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि श्रीमद्भागवत पुराण कथा करवाने से पित्र दोष प्रेतबाधा से सदा सर्वदा के लिए मुक्ति मिलती है।
9.जिस घर में भगवद्गीता का पाठ होता है उस घर में प्रेतदोष नही रहता और गर्भगीता के पाठ से प्रेतयोनि से मुक्ति होती है।
10.घर में नित्यप्रति गाय के गोबर के कंडे पर देसी घी की गूगल और बतासे या गुड़ मिलाकर होम देने से पित्र खुश होते है।
11.गाय माता की सेवा या गोदान करने से साधक के सात कुल तर जाते है।
12.ब्राह्मण को या कुलप्रोहित को दान देने से पित्र प्रसन्न
होते है। कभी भी अपना कुलप्रोहित ना बदलें।
13.गायित्री यज्ञ और अनुष्ठान भी करवाया जा सकता है।
14.कुलप्रोहित कभी नही बदलना चाहिए। और उनका यथायोग्य दक्षिणा देकर सम्मान करें।
15.भगवान विष्णु की आराधना करने से और एकादशी, त्रयोदसी, या पूर्णिमा का आजीवन व्रत करने से भी पित्र खुश होते हैं।
16.दान करना धर्म संगत है लेकिन उससे पहले आपमे दान से अधिक श्रद्धा होनी चाहिए।
17.प्रति रविवार को या प्रति रात्रि सोने से पहले घर के मुख्य सदस्य द्वारा घर की दक्षिणी दीवार में तिल्ली के तेल का दीपक पितरो की शांति हेतु लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
यहां पर मैं आप लोगों से एक साबर मन्त्र की साधना दे रहा हु मैं आशा करता हूँ कि इस साधना से आप को बहुत लाभ होगा इसको मैने बहुत लोगों से ये अनुष्ठान संपन्न करवाया है इससे उनको लाभ भी हुआ है।
जब भी साल में पित्र पक्ष आए या जब भी जरूरत हो तो किसी भी कृष्णपक्ष में प्रथम तिथि से पूर्व ही सभी तैयारियां कर लेनी है और इस साधना को करना है और इससे आपको 15 दिन की की गई साधना से आपको पित्र दोष प्रेतदोष से मुक्ति मिल जाएगी।
 
मन्त्र:-
पित्र ब्रह्मा पित्र विष्णु पित्र देव महेश।पित्र देव कृपा करें काटे सभी क्लेश। 
धन दौलत बरखा को करू तेरी होम अग्यारी।मेरे कारज सिद्ध करो 
जै जै कर तुम्हारी।दुहाई सती माता अनसूया की।
 
ये मन्त्र सरल सक्षम ,जाग्रत और सिद्ध है। जब भी कभी पितृपक्ष आये तो ब्रह्मचर्य से युक्त हो संयम रखें और प्रतिदिन रात्रि में पूर्वाभिमुख होकर अपने सामने आम के एक पटरे पर सफेद कपडा बिछाकर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें और चंदन की माला उनको पहनाएं शुद्ध देसी का दीपक प्रज्वलित करके गणेश और गुरु के सामान्य पूजनोउपरांत पित्र देव का एक पानी वाले नारियल पर सफेद कपड़े लपेटकर उस पर आवाहन करें और उनका पूजन करें पूजन में सफ़ेद रंग की वस्तुओं की प्रधानता होगी कुशा के आसन का ही प्रयोग करें। उपरोक्त मन्त्र का रुद्राक्ष की माला से 11 माला सुबह 11 माला शाम को जाप करें।सुद्धता का पूर्ण रूप से ध्यान रखें।और लाभ देखें अमावस्या वाले दिन से एक दिन पहले ब्राह्मण को निमंत्रण दे और अमावस्या की सुबह प्रीति युक्त भोजन बनाएं और ब्राह्मण को भोजन करवाएं साथ में वस्त्र और कुछ धन जितना आपकी समर्थ हो दे और ब्राह्मण को विदा करें फिर जिस चित्र का आपने पूजन किया था उसे अगर आपका व्यापार नही चलता तो उसे कार्यस्थल पर लगा दें और अगर घर में क्लेश होता हो तो घर में लगादें।और लाभ प्राप्त करें।
 

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

Black Magic – Asan par Suraksha ka Shabar Mantra

Black Magic – Asan par Suraksha ka Shabar Mantra 


This Strong Black Magic spells is used to protect yourself while doing the Sadhna or any Work on Seat. Yes this is called Protection Spells on Seat for any work which is going to start.

Black Magic – Asan par Suraksha ka Shabar Mantra
Black Magic – Asan par Suraksha ka Shabar Mantra

Protection Strong Black Magic Spells:


Om Asan Ishwar Asan Indr |

Asan Baithe Guru Govind |

Ajr Asan Vajr Kapaat |

Ajr Juda Pind Sohn Dwar |

Jo Dhaale Ajr Par Ghaav |

Ult Veer Vaahi Ko Khaav |

Asan Baithe Guru Ramanand |

Daoo kar jod asan ki raksha Karen |

Kaya Asan Baithe Laxman Yati |

Sohn Govind Padhi Asan Par |

Om rn Sohn man ki Bhmrna duri khoye |

Raatri Rakhe Chandrma |

Din Ko Raakhe Bhaanu |

Dharti Mata sada Rakhai |

Kali kantak duri bhaage |

Karega so bharega |

Bhakt Jnon ki Raksha Veer Hanuman Karega |


Protection Strong Black Magic Spells Ritual: On the occasion of Moon Eclipse chant it 21 Mala and sidh (Activate its Power). Then whenever you are going to start any important work or Sadhna just chant it and exhale on around your seat before seating on it.

 Asan par Suraksha ka Shabar Mantra - आसन शाबर मन्त्र

॥ मंत्र ॥
ॐ आसन ईश्वर आसन इंद्र।
आसन बैठे गुरु गोविन्द।
अजर आसन वज्र कपाट।
अजर जुड़ा पिंड सोहं द्वार।
जो धाले अज़र पर घाव।
उल्ट वीर वाह्य को खाव।
आसन बैठे गुरु रामानंद।
दो कर जोड़ आसन कि रक्षा करें।
काया आस
न बैठे लक्ष्मण यति।
सोहं गोविन्द पढ़ी आसन पर।
ॐ रैं सोहं मन की भम्रणा दुरि खोयें।
रात्रि राखे चन्द्रमा।
दिन को राखे भानु।
धरती माता सद राखै।
काली कंटक दुरी भागे।
करेगा सो भरेगा।
भक्त जन कि रक्षा वीर हनुमान करेगा।


विधि: पहले इस मन्त्र को चँद्रमा ग्रहण पर 21 माला जप कर सिद्ध कर लो। फिर कोई भी  कार्य करने से पहले इस मन्त्र को जप कर आसन के चारों ओर फूंक मार कर बैठ जाओ।  फिर अपनी साधना करो या कार्य करो। जरूर सफलता मिलेगी।

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

Black Magic Identification Spells_Kiya Karaya Prichay

Black Magic Identification Spells – Kiya Karaya Prichay - किया कराया परिचय


In this Spells the black magic will speak itself and tell you all how it happen and who did it on you or patient. This is very effective spells and controls the black magic immediately.
Black Magic Identification Spells_Kiya Karaya Prichay
Black Magic Identification Spells_Kiya Karaya Prichay 

Black Magic Identification Spells:



Om onkaar Sadguru Parsaadi |


Duhaai Khuda Di |

Duhaai Rsul Di |

Duhaai Peer Pagaimber Ki |

Duhaai Hajrat Ali Ki |

Duhaai Ambr ki |

Duhaai Muhmmad Hni Fakir Ki |

Duhaai ek laakh Assi Hajaar Pagaimber di |

Duhaai Bawan Veer Ki |

Duhaai Chausoth Yogini |

Chaurasi Sidh nav naath ki |

Sahapri | Bubpri | Tkhpri |

Hoor pri | Noor Pri | Lal Pri |

Safed Pri | Saha ki Duhaai |

Kaun Kaun Pakad Chle |

Aage Kluva Veer Chle |

Peeche Muhmmad veer chle |

Hanumant Veer Chle |

Lnku Dheepa Veer Chle |

Angad Chle |

Baavan Veer, Chousath Yogini |

Sidh Nau Naath Hajrat Shah Bhi |

Mke Baan Nadi Naav ka Poora |

Dev Bhoot Jinn Khabisa |

Devni Bhootni Jinni Khbisni |

Chudail ke Laage Teer |

Atthais Thaam Nau Sutaa Jaaon |

Madhi Masaani Rkkhevirkh Veg se |

Pkdili Aaoo | Sidh Bhairon shri Bala Jati |

Bhairon Jati | Lakshman Jati | Doda jati |

Shukr Jati | Hnvant Jati | Angad Jati |

Bhairon Bhwaal chetrpaal |

Kalka Maai ka poot |

Chadhi Bathi ka jaitvaar rausa Chle |

Jaise Nadi Naav ka Teer |

Jinn, Bhoot ko, Dev ko, Plit Ko |

Khavis ko, Daakini ko, Sihaari ko |

Chaar Ghoont Saihn Kaarili aaon |

Band kare |

Sir Chadh Khele | Mukh chadh bole |

Guru ki Shakti |

Humari bhakti |

Furomantra ishwara mahadev teri nvacha furai |


Black Magic Identification Spells Ritual: On the moonless night chant this spells 51 * 108 times to activated its power. Then when required then just chant it thrice and exhale on patient, the black magic will speak itself and provide you all information that who did, why did and when did.



Kiya Karaya Prichay - किया कराया परिचय



॥ मंत्र ॥

ॐ ओंकार सतगुरु प्रसादी।
दुहाई खुदा दी।
दुहाई रसूल दी।
दुहाई पीर पैगम्बर की।
दुहाई हजरत अली की।
दुहाई अंबर की।
दुहाई मुहम्मद हनी फ़क़ीर की।
दुहाई इक लाख अस्सी हजार पैगंबर दी।
दुहाई बावन वीर की।
दुहाई चौसठ योगिनी।
चौरासी सिद्ध नव नाथ की।
साहापरी।  बुबपरी। तखतपरी।
हूर परी।  नूर परी।  लाल परी।
सफ़ेद परी। साहा की दुहाई।
कौन कौन पकड़ चले।
आगे कलुवा वीर चले।
पीछे मुहम्मद वीर चले।
हनुमंत वीर चले।
लंकू ढीपा वीर चले।
अंगद चले।  बावन वीर, चौसठ योगिनी।
सिद्ध नो नाथ हजरत शाह भी।
मके बाण नदी नाव का पूरा।
देव भूत जीन खवीसा।
देवनि भूतनी जिन्नी खवीसनी।
चुड़ैल के लागे तीर।
अठाईस ठाम नौ सुता जाऊं।
मढ़ी मसानी रक्खेविरख वेग से।
पकडीली आऊ।
सिद्ध भैरों श्री बल जति।
भैरों जति।
लक्ष्मण जति।
कुमार जती।
डोडा जती ।
शुक्र जती।
हणवंत जती।
अंगद जती।
भैरो भवाल छेत्रपाल।
कालका माई का पूत।
चढ़ी भठी का जैतवार रैसा चले।
जैसे नदी नाव का तीर।
जिन्न, भूत को, देव को, पलीत को।
खवीस को, डाकिनी को, सिहारी को।
चार खूंट सैह्ण करिली आऊँ।
बंद करे।
सिर चढ़ खेले।
मुख चढ़ बोले।
गुरु की शक्ति।
हमारी शक्ति।
फुरोमंत्र ईश्वर महादेव तेरी वाचा फुरै।


विधि: अमावस की काली रात को 51 माला जप कर सरसों के तेल का दीपक जल कर। अब जब भी जरूरत हो मंत्र 3 बार पढ़ कर रोगी पर फूंक मारो उसमे जो भी काली शक्ति विद्यमान है वो खुद बोल कर अपना परिचय देगी।

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