शाबर मंत्र, तंत्र यंत्र साधना, गुरु गोरखनाथ परंपरा के प्राचीन सिद्ध मंत्र, वशीकरण, सुरक्षा मंत्र, बाधा निवारण मंत्र और शक्तिशाली लोकपरंपरा आधारित साधनाओं का संपूर्ण ज्ञान। यहाँ आप सरल मंत्र विधि, प्रयोग, तांत्रिक माध्यम और आध्यात्मिक जानकारी आसानी से सीख सकते हैं।

Yantra लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Yantra लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2022

vahan durghatna nashak maruti yantra

 वाहन दुर्घटना नाशक मारुतियन्त्र

यह कथा तो सर्व प्रसिद्ध हैं कि महाभारत युद्ध के समय वीरवर अर्जुन के रथ के अग्रभाग पर मारुति ध्वज व मारुति यन्त्र लगा हुआ था। जिसके प्रभाव से सम्पूर्ण युद्ध के दौरान हज़ारों लाखों प्रकार के आग्नेय अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार होने के बावजूद भी अर्जुन का रथ जरा सा भी क्षत-विक्षत नहीं हुआ। भगवान् श्रीकृष्ण इस रहस्य को जानते थे कि जिस रथ, वाहन की रक्षा स्वयं मारुति-नन्दन करते हों, वह दुर्घटनाग्रस्त कैसे हो सकता है ! उसका तो वाहन द्रुतगति से, वायुवेग से, निर्बाध गति से अपने लक्ष्य पर विजय पताका फहराता हुआ पहुंचेगा। अनेक विद्वानों , शोध छात्रों ने इस मारुति यन्त्र का पता लगाने हेतु अथक प्रयत्न किये, अन्ततोगत्वा मई 1983 के आसपास अज्ञातदर्शन के सम्पादक पं. भोजराज द्विवेदी ने इस यन्त्र का पता लगा लिया तथा भोजपत्र पर इस यन्त्र को बनवाकर, इसके सार्वजनिक प्रयोग प्रारम्भ किये।

vahan durghatna nashak maruti yantra
vahan durghatna nashak maruti yantra


ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय. महाबलाय स्वाहा ।। लोगों ने दुर्घटना नाशक इस यन्त्र को अपने स्वाहन के अगले हिस्सों पर लगाया। आज दिन तक वे वाहन न तो दुर्घटनाग्रस्त हुए न ही उनको किसी प्रकार से कोई खरोंच तक आई है। लोगों ने इस मारुति यन्त्र की प्रशंसा की है।  जो स्वयं घर पर बनाना चाहें तो विधि इस प्रकार है।


यन्त्र बनाने की विधि


किसी भी मंगलवार या शुभ मुहूर्त में हनुमान मन्दिर या हनुमान जी की मूर्ति के सामने, धूप-दीप लगाकर भोजपत्र वा अष्टगन्ध से या ताम्रपत्र पर इस यन्त्र को बनावें। इस यन्त्र के मूल मन्त्र का 1008 जप करें। गुड़ या नैवेद्य का भोग श्री हनुमान जी को लगाएं। फिर सिन्दूर, लाल पुष्प, यन्त्र पर चढ़ाएं तत्पश्चात श्रेष्ठ चौघड़िये (समय) में यन्त्र को अपने वाहन पर लगाएं एवं इसका चमत्कार देखें।

मूल मन्त्र यह है- "ॐ मारुतात्मने नमः हरि मर्कट, मर्कटाय स्वाहा, ॐ क्लीं रं रं मारुते रं रं उं जं उं जं उं जं उं।" उपरोक्त मन्त्र से पूरित किया हुआ यन्त्र वाहन के लिये कवच का काम करता है। फिर यन्त्र पर लिखा हुआ दोहा 108 बार पढ़ने से वाहन पूर्ण रूप से अभिमन्त्रित होकर अनुकूल व शुभ लाभ देने वाला हो जाता है।


सोमवार, 4 अप्रैल 2022

Navgrah shanti ke liya janjira

नवग्रह शान्ति के लिए जंजीरा

 

सिद्ध मन्त्र 

मोहि अनुचर कर केतिक बाता।
तेहि महँ कसुमउ बाम बिधाता॥ 

विधि: 

राम नवमी वाले दिन रुद्राक्ष की माला पर 1100 जप नित्य करते हुए 40 दिन पूर्ण करें। 41 वें दिन अखण्ड रामायण का पाठ करवायें और गरीबों को भोजन करवाकर वस्त्रदान करें। इस मन्त्र के प्रयोग से दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता है। नवग्रह क्षति नहीं पहुँचाते और प्रभु कृपा की प्राप्ति हो जाती है।


नवग्रह दोष निवारण सिद्ध मन्त्र 

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु।

 शशि भूमि-सुतो बुधश्च-गुरुश्च ॥ 

शुक्र शनि राहु केतवः।

सर्व ग्रहा शान्ति करु भवन्तु।

 

 

Navgrah shanti ke liya Yantra
Navgrah shanti ke liya Yantra

  विधि :

 किसी भी रविवार को पूर्व दिशा की ओर मुँह करके यह प्रयोग शुरू करना चाहिए। अपने सामने सफेद सूती आसन लगाकर उस पर नवग्रह यन्त्र स्थापित कर दें और यन्त्र का असली केशर का तिलक करके घी का दीपक जलाकर काटक का माला से इस मन्त्र का ५१ हजार जप करें। फिर  अपने घर के पूजा वाले स्थान में स्थापित करें। यह यन्त्र क हर प्रकार के ग्रह दोषों को समाप्त करके जिन्दगी को सुखमय बना देता है।

 

Navgrah shanti ke liyaYantra
Navgrah shanti ke liyaYantra 2

विधि : 

इस सिद्ध यन्त्र को भोजपत्र पर लाल चन्दन, केशर तथा गोरोचन से लिखकर पूजा स्थल पर स्थापित कर पूजा करने से समस्त ग्रह अपना बुरा प्रभाव छोड कर शुभता प्रदान करने लगते हैं। इस यन्त्र को भोजपत्र पर केशर से शुभ समय में लिखें। इसको  धारण करने से नौ ग्रह पीड़ा नहीं देते।

 

सिद्ध तन्त्र प्रयोग

सर्व ग्रह की शान्ति के लिए कूठ, खिल्ला, सरसों, कांगनी, देवदारू, हल्दी सर्वोषधि तथा लोध इन सबको मिलाकर चूर्ण कर किसी तीर्थ के पानी में मिलाकर भगवान का स्मरण करता हुआ जातक स्नान करें तो सर्वग्रहों की शान्ति होती है।

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

Vyapar Vridhi Yantra

व्यापार वृद्धि यंत्र-Vyapar Vridhi Yantra


Vyapar Vridhi Yantra यह यंत्र जिस स्थान  पर होता है, वहाॅ सदैव आनन्द मंगल रहता है। भूप-पिशाचदि का भय नहीं होता। पहले का भूतादि प्रयोग नष्ट हो जाता है। यदि आप भी निचे दिए गए प्रश्नो का अनुसरण हो तो इस यन्त्र को अवश्य बनाये

क्या आप व्यवसाय या पेशेवर विषय  पर आर्थिक रूप से पीड़ित हैं?


क्या आप बेरोजगार हैं और एक अच्छी नौकरी पाना मुश्किल लगता है?


क्या आपने कोई नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बनाई है या शुरू की है?


यदि आपने उपरोक्त में से किसी भी प्रश्न का उत्तर "हाँ" में दिया है, तो आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यवाही करनी चाहिए और एक व्यापार वृद्धि यंत्र Vyapar Vridhi Yantra प्राप्त करना चाहिए।

यह Vyapar Vridhi Yantra यन्त्र मालिक को सफलता, धन, समृद्धि और व्यवसाय और करियर के पहलुओं में प्रगति का आशीर्वाद देता है।

Vyapar Vridhi Yantra का स्वामी अपने सभी उद्देश्यों और लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकता है और जीवन के सभी पहलुओं में सफलता प्राप्त कर सकता है।

 व्यापार वृद्धि यन्त्र कैसे बनाया जाता है 


इसे तैयार करने के लिए दाड़िम की लेखनी एवं अष्टगंध की स्याही बनाकर भोजपत्र लें जिसमें कि छेद न हो। शुभ महुर्त में पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैंठे। मुख में मिश्री लेकर इस यंत्र को लिखें।


Vyapar Vridhi Yantra
Vyapar Vridhi Yantra



आपको बस इतना करना है कि इस व्यापर को व्यापार के स्थान जैसे कार्यालय, दुकान या शोरूम में रखें और अत्यन्त प्रभावशाली यन्त्र है। व्यापारी गल्ले में रखें। गद्दी के नीचे भी रख सकते है। अपने व्यवसाय को पैसे बनाने की मशीन में बदल दें।

मन्त्र जिसे आपको व्यापार वृद्धि के लिए जाप करने की आवश्यकता है: “ओम अकर्षाय स्वाहा”


व्यापार करने वाले सभी लोगों के लिए, जो लोग बेरोजगार हैं, वे लोग जो अपनी नौकरियों में पदोन्नति चाहते हैं, बिना किसी संदेह के, यह एक जरूरी काम है। यह एक  अत्यन्त प्रभावशाली यन्त्र है। व्यापारी गल्ले में रखें। गद्दी के नीचे भी रख सकते है।

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

Money Wealth Spells – Dhan Kuber ka Achook Mayavi Mantra

Money Wealth Spells – Dhan Kuber ka Achook Mayavi Mantra - धन लक्ष्मी प्राप्ति का अचूक चमत्कारी मायावी मंत्र

Dhan Kuber ka Achook Mayavi Mantra - धन लक्ष्मी प्राप्ति का अचूक चमत्कारी मायावी

Money Wealth Spells – Dhan Kuber ka Achook Mayavi Mantra
Money Wealth Spells – Dhan Kuber ka Achook Mayavi Mantra 

यह धन मंत्र धन पाने के लिए बहुत शक्तिशाली और मजबूत है। यह मुश्किल नहीं है और कोई भी इसे बिना किसी डर / समस्या के कर सकता है। बस इसे नीचे दिए गए अनुष्ठान के रूप में करें और अपनी इच्छा के अनुसार परिणाम प्राप्त करें। एक मंत्र का प्रभाव 100 प्रतिशत होता है इस मंत्र को अपने इष्ट देव को याद करते हुआ अपने मन को धर्ये एव  संयम रखते हुआ किया जाने पर बहुत अच्छा  परिणाम मिलता है 

 || मंत्र: ||

ॐ यक्षायै कुबेरायै वैष्णवायै धनधान्याधिपते धनधान्यसमृद्धेन में देहि दाप स्वाहा:


विधि: लक्ष्मी प्राप्ति की ये साधना कुबेर भगवन की साधना है।  इसके लिए पहले कुबेर या लक्ष्मी यन्त्र का प्रबंध कर लो। नहा कर पीले धुले हुए कपडे पहन लो।


समय - जिस दिन अमावस हो और रविवार हो उस रात ये साधना करनी है , बस एक रात की ही ये साधना है इस से आपके धन प्राप्ति के मार्ग खुल जायेंगे।
Note:-

  • साधक को रात के वक़्त खाली पेट रहना होगा।
  • कुबेर यन्त्र को पीले कपडे के आसान पर किसी आम की टेबल पर स्थापित करो और पूजन करो।
  • कोई पीले रंग की मिठाई ही अगर घर पर बनी हुई हो तो परसाद के लिए साथ रख सकते हो। घी का दिया जलाओ और धुप बत्ती लगाओ।


अब दिए गए मंत्र की मूंगे की माला से बस 11 माला का जप करना है।  जप के बाद गौ माता की आरती भी करनी है उसी दिए और धुप से और फिर वापिस दिए और धुप को अपनी जगह रख दो और गाय का परसाद गाय को खिला दो और फिर बाँट दो।

अब आपके धन प्राप्ति के सभी मार्ग खुले मिलेंगे।

इस यन्त्र को आप घर पर ऑनलाइन ऑडर  देने के लिए        क्लिक करे 


Money Wealth Spells – Dhan Kuber ka Achook Mayavi Mantra 

This Money spells is very powerful and strong to get wealth. This is not difficult and anyone can do it without any fear / problem. Just do it as the ritual provided below and get the result as per your desire.
This Money or Wealth spells is very easy even for a child and  a child can perform this ritual at home easily.


Powerful Money Wealth Spells -



       Om Yakshay Kuberaay Vashnavay Dhandhaanydhi pate  Dhandhanya  Smaridhen  Men Dehi Daapy Swaha: 




Powerful Money Wealth Spells Ritual –This spells ritual need to do according to provided ritual below then definitely it will work as per your money desire.



  • First bring or arrange the Kuber Yantra. Put It in pure washed soil pot.  This soil pot should be on the Yellow sheet and on mango tree wooden stage / table / stool etc.
  • Appropriate Time – Moon Night -  Amavas and Sunday Mean you need to do it at night time when it is Moon and Sunday.
  • Keep the Yellow sweets made at home as Parsaad. Enlight the Ghee Lamp and Incense (Agarbatti or Dhop Batti).
  • Devotee should not eat anything at the time of Night and after bath wear yellow fresh clothes and sit on Yellow seat of blanket.
  • Now chant the spells provided above only 1100 time with the rosary of Coral (Munga) or 11 Rosary.
  • After chanting the spells offer Aarti to Cow and Parsad to Cow.



Do as it is as provided above provided Money spells ritual for wealth and get your desire money/wealth.
 THIS YANTRA ONLINE BOOK HERE   Click Here


सोमवार, 30 दिसंबर 2019

Yantra-Kamraj, Vashikaran, Najar Totka,

Yantra-Kamraj- Vashikaran- Nazar Totka

  • स्त्रीवश्यकरं कामराज यन्त्र ||Female Vashikaran Kamaraj Yantra
स्त्रीवश्यकरं कामराज यन्त्र
स्त्रीवश्यकरं कामराज यन्त्र

इस यन्त्र को स्त्री वशीकरण हेतु लिखा जाता है । गोरोचन, कुंकुम, लाल चन्दन, कस्तूरी को  मिलाकर चमेली की कलम से भोजपत्र के ऊपर लिखें। यन्त्र के लिखने के बाद लकड़ी के टुकड़े पर  राई से कामदेव की प्रतिमा बना कर लिखा यन्त्र, प्रतिमा के हृदय में स्थापित कर दें। पुष्प, धूप, दीपादि से पूजन करें तो साध्य स्त्री दासी के भाँति सेवा करने लगेगी। सदैव लाभ के  लिए प्रति दिवस पूजन करना चाहिए। पूजन के समय यह मन्त्र भी पढ़ा जाय कामोऽनङ्गः पुष्पशरः कन्दो मीनकेतनः । श्री विष्णुतनयो देवः प्रसन्नो भव मे प्रभो। यह सारा जाप एवं पूजन रात्रि को गुप्त स्थान में ही  करें। इस स्त्री वश्यकारक महायन्त्र को हर किसी को नहीं देना चाहिए।

  •  वशीकरण तथा दुष्ट स्तम्भन यन्त्र||vasheekaran  dusht stambhan yantra
वशीकरण तथा दुष्ट स्तम्भन यन्त्र
वशीकरण तथा दुष्ट स्तम्भन यन्त्र

जब किसी का अधिकारी क्रुद्ध होकर हानि करे या ऐसी आशंक लगे कि वह हानि पहुँचायेगा तो  उसके वशीकरण के लिए इस यन्त्र का प्रयोग करें। इसी भाँति किसी को शत्रु के द्वारा झूठ प्रचार  करके आपकी मानहानि कर रहा हो तो भी इस यन्त्र के प्रयोग से लाभ मिलेगा। अनार की कलम से भोज पत्र पर गोरोचन तथा कुंकुम से इस प्रभावशाली यत्र को लिखें। देवदत्त के स्थान पर साध्य व्यक्ति का नाम लिखें तथा शराब में सम्पुट करके पूजन करें तो अधिकारी वश में  होगा तथा दुष्ट का मुख स्तम्भित होगा।


  • सुख प्रसव यन्त्र||sukh prasav Yantra

सुख प्रसव यन्त्र
सुख प्रसव यन्त्र

अगर किसी गर्भिणी को यह भय हो या वास्तव में ही भूत आदि लगे हों तो इस यन्त्रराज को धारण  करें। इसके धारण से प्रत्येक व्यथा का अन्त हो जाता है। भूतादिक भाग जाते हैं। स्त्री की तथा गर्भ  की रक्षा होती है।  इसे लिखने के लिए हाथी के मद को खरल करें तथा गुलाब जल मिलाकर स्याही बना लें। अनार की  कलम से भोज पत्र पर लिखें तथा पूजन करके त्रिलोह के ताबीज में भर कर गर्भिणी के कण्ठ में  पहना देने पर प्रसव सुख से होता है। जच्चा-बच्चा की रक्षा होती है और कोई भी अलाबला भविष्य में परेशान नहीं करेगी।

  •  अरिनिवारण यन्त्र||Arinivarana yantra 

 अरिनिवारण यन्त्र
 अरिनिवारण यन्त्र

इस यन्त्र को भोज पत्र पर लिखें। विधि के अनुसार पूजन करें तथा त्रिलोह के ताबीज में भर कर धारण करें या घर पर स्थापित करें तो सर्प, व्याघ्र, चोर आदि का भय न होगा तथा अन्य सभी  उपद्रव भी शान्त हो जाते हैं।

  •  गर्भ रक्षा यन्त्र ||Womb protection mantra

गर्भ रक्षा यन्त्र
गर्भ रक्षा यन्त्र 

इस गर्भ रक्षा यन्त्र के निर्माण हेतु हाथी का मद लाकर गुलाब जल में मिलाकर खरल करें। अनार  की कलम लेकर भोजपत्र पर इस यन्त्र को लिखें। विधिवत् पूजन करके चाँदी के ताबीज में भर करके  गर्भवती महिला के कण्ठ में धारण करें तो हानि के सम्पूर्ण दोष समाप्त होकर गर्भ रक्षा होगी तथा  प्रसव सुख से होगा।

  •  नौ ग्रह शान्ति यन्त्र || nau grah shaanti yantra


नौ ग्रह शान्ति यन्त्र
नौ ग्रह शान्ति यन्त्र


इस यन्त्र को भोजपत्र पर केशर से शुभ समय में लिखें। इसके धारक को नौ ग्रह पीड़ा नहीं देते।


  • नजर टोक यन्त्र || Nazar tokta Yantra

नजर टोक यन्त्र
नजर टोक यन्त्र

 भोजपत्र या कागज पर ही अष्टगंध की स्याही बनाकर अनार की कलम से  लिखकर धारण करने से लगी हुई नजर दूर होती है एवं धारण किये रहने से भविष्य में नजर नहीं  लगती।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

Hast Samudirk Ke Anusar sadhna-हस्त सामुद्रिक के अनुसार साधन

Hast Samudirk Ke Anusar sadhna||हस्त सामुद्रिक के अनुसार साधन 

हस्त सामुद्रिक के अनुसार साधन
हस्त सामुद्रिक के अनुसार साधन 

पूर्व ही बताये गये ज्योतिष सिद्धान्त में ग्रहों को तो आप पूर्ववत्त ही समझें तथा हाथ (दाहिने) में उनकी स्थिति को चित्रानुसार स्मरण कर लें। हाथ में समुद्र सी गहराइयाँ होती हैं जिन्हें कि यहाँ स्पष्ट कर पाना सम्भव नहीं है। यहाँ पर उपासना विषय पर संक्षिप्त प्रकाश डाल रहा हूँ। चित्र में दर्शाये स्थान लिखे हुए ग्रहों के होते हैं। अंगुलियों के अन्त तथा हस्त के प्रारम्भ में अर्थात् हाथ के उस स्थान पर जहाँ से अंगुली का प्रारम्भ हुआ है एक उभरा या धंसा हुआ स्थान होता है जिसे कि पर्वत कहते हैं। चित्र में दिखाये नाम उन्हीं स्थानों पर समझें और यही पर्वत उन ग्रहों को सूचित करते हैं । जो पर्वत उभरा उठा हुआ हो उसे उच्च का समझें, धंसें या दबे पर्वत को नीच का समझें तथा समतल पर्वत को मध्य की स्थिति का सूचक जानना चाहिए। शनि पर्वत के कारण विचारें कि वह व्यक्ति व्यस्त, समाज से दूर, रहस्य भरे विषय का प्रेमी, जंगल पहाड़ पर भूत-प्रेत जगाने में मस्त, जादूगर आदि होगा।
इस विषय को भी भविष्य में अलग किसी पुस्तक में विस्तृत रूप से प्रकाशित किया जायेगा। हमें आशा है कि अभी तक प्रस्तुत विषय सामग्री पाठकों के लिए चाहे वह साधक हों या न हों, लाभदायक प्रमाणित तो होगी ही, इससे उनका और भी अधिक मार्गदर्शन होगा। प्रस्तुत पुस्तक के मुख्य आकर्षण पर आप आ चुके हैं।
शमशान साधन आदि में आसन पर बैठकर सर्वप्रथम अपने शरीर को बंध लगायें जिससे कि आपकी कोई हानि न हो। किसी भी बंध आदि के न जानने पर हाथ में पीली सरसों लेकर निम्नलिखित मन्त्र बोलें

ऊँ अपक्रामन्तु ते भूता ये भूता भूतलेस्थिताः । 
ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नशयन्तु शिवाज्ञयाः । 
अपक्रामन्तु भूतानि, पिशाच: सर्वतो दिशम् । 
सर्वेषामविरोधेन पूजा कर्म समारंभे ॥
ऊँ सर्व विघ्नानुत्सार यो सारय हुं फट् स्वाहा ॥ 

इसके पश्चात् अपने चारों तरफ उक्त सरसों बिखरा दें फिर बाँए पाँव से पृथ्वी पर तीन बार आघात करें। इस क्रिया को करने के बाद तीन बार ताली बजायें। “ऊँ अस्त्राय फट्" बोलते हुए दशों दिशाओं की तरफ हाथ करके चुटकी बजायें । तत्पश्चात् कर्म के लिए निश्चित दिशा की तरफ दिव्य दृष्टि से देखें और फिर आसन पर बैठ कर कार्य का शुभारम्भ करें।

Yantra kaise likhe-यन्त्र कैसे लिखें

Yantra kaise likhe||यन्त्र कैसे लिखें

सर्वप्रथम यन्त्र को विधि के अनुसार चित्रित करें। अपने आसन के सामने कुछ पुष्प फैला कर एक कलश में जल भरके, उन फूलों के मध्य कलश को रख दें। कलश को ढक करके पुष्पादि से पूजन करें तथा उसके ऊपर लिखे यन्त्र को रख कर धूप-दीपादि करें। इसके बाद श्री सर्व यन्त्र मन्त्र तन्त्र उत्कीलन का पाठ करें। इस क्रिया के चलते समय यन्त्र सामने रहना चाहिए। पाठ के बाद यन्त्र की विधिवत् पूजा कर लेनी चाहिए। पूजा के बाद श्रद्धानुसार यन्त्र का प्रयोग करें तो अवश्य ही उसका प्रभाव अति शीघ्र होगा। प्रस्तुत पुस्तक के यन्त्र अति प्रभावी हैं अत: इनको लिख कर ही प्रयोग करने से लाभ की प्राप्ति की जा सकती है। किसी विशेष प्रयोजन में उपरोक्त उत्कीलन विधि को प्रयोग में लायें। यन्त्र प्रयोग या यन्त्र लेखन करते समय गत पृष्ठों में बतलायी सभी बातों को ध्यानपूर्वक समझकर यथा समय प्रयोग में लाए, तभी यन्त्र साधना में सफलता मिलेगी। यन्त्र साधना में दृढ इच्छा शक्ति, विश्वास और प्रबल आस्था के बल पर ही सफलता मिलती है।

1.महारक्षा यन्त्र

महारक्षा यन्त्र

महारक्षा यन्त्र


इस महारक्षा यन्त्र को लिखने के लिए गोरोचन, कुंकुम या चन्दन, कर्पूर और भोजपत्र का प्रबन्ध करें। रवि पुष्य या गुरु पुष्य के शुभ दिवस में इस यन्त्र को लिखें। सफेद धागा लेकर यन्त्र पर लपेट करके रेशमी वस्त्र से आच्छादित करें। विधिवत् पूजन हेतु कलश पर स्थापित करें। गंध, पुष्प, नैवेद्य, धूप, दीपादि से पूजन करें और फिर चाँदी के ताबीज में भर कर धारण करें। इस प्राचीन, अत्यन्त प्रभावी, शीघ्र ही लाभकारी महायन्त्र के धारण करते ही सभी रोग नष्ट होकर स्वस्थ लाभ होता है। शत्रुओं का तो तत्काल ही विनाश हो जाता है। अविष्ट ग्रहों का स्तम्भन होकर सुख-सौभाग्य की प्राप्ति हो जाती है।

सोमवार, 16 दिसंबर 2019

यन्त्र साधना की आवश्यक बातें

यन्त्र साधना की आवश्यक बातें

यन्त्र साधना की आवश्यक बातें
यन्त्र साधना की आवश्यक बातें


यन्त्र क्या है?

  • यन्त्रों के द्वारा स्वयं ही स्वयं का उपचार करें। 
  •  यन्त्र शीघ्र प्रभाव दिखाते हैं। 
  • कलियुग में यन्त्रों को विशेष प्रभावी कहा गया है। 
  • यन्त्र धारक के शरीर पर आकाशीय ग्रहों की भाँति कार्य करता है। 
  • नित्य यन्त्र लिखने से भूत प्रेतादि जैसी समस्यायें पैदा नही होती, यदि हुई हों तो शीघ्र ही समाप्त हो जाती हैं। 
  • यन्त्रों में जो शक्ति है वह तो प्रबल है ही। इसमें और भी अधिक शक्ति का संचार यन्त्र का साधक अपनी आत्मा के बल से प्रस्तुत करता है। 
  • यन्त्रों से लाभ उठाने के लिए यन्त्रों पर विश्वास करें।
  • वशीकरण, शान्ति तथा पौष्टिक यन्त्र लिखते समय प्रसन्न मुद्रा में रहें तथा मुख में मीठा पान रख लें। मारण, स्तम्भन तथा उच्चाटन आदि के यत्र लिखते समय काले वस्त्र पहनें तथा मुख में विरसता पैदा करने वाली कोई चीज रख लें। 
  • यन्त्र, मन्त्र तथा तन्त्र एक दूसरे के पूरक हैं। 
  •  रेखांकन को यन्त्र कहते हैं।
  •  शब्दों के समूह को मन्त्र कहते हैं। 
  •  वनस्पति की गुह्य शक्ति को तन्त्र कहते हैं।
  •  यन्त्र, मन्त्र तथा तन्त्र का एक साथ प्रयोग करने वाले को तान्त्रिक कहते हैं।
  •  यन्त्र को लिखना तथा उससे लाभ उठाना अत्यन्त सरल है।
  • आज भी कई विशेष धार्मिक तीर्थ स्थलों पर, मुख्य द्वार पर तथा मूर्ति के पास पत्थरों पर खुदे यन्त्र दृष्टिगोचर होते हैं।
  •  बहुत से मन्दिरों के बुर्ज तथा भीतरी हिस्से यन्त्र की शैली के अनुसार बनाये गये मिलते हैं।
  •  यन्त्र साधन तांत्रिक विद्या का सबसे सरल तथा सुलभ साधन है। 
  •  यन्त्र कभी निराश नहीं करते। 
  •  यन्त्र आत्मबल बढ़ाते हैं।


यन्त्र साधना से पहले यह सब ध्यान रखें!

 यन्त्र विद्या यद्यपि प्रतिमा पूजा काल के युग से भी बहुत प्राचीन है। इस पर भी एक आकर्षण का केन्द्र है। मन्त्र शास्त्र की अनेक कठिनाइयों को देखते हुए ही सम्भवत: यन्त्रों को सहर्ष स्वीकार किया गया था। जबकि यन्त्र निर्माण भी कोई आसान पद्धति नहीं है। रेखात्मक, वर्णात्मक, अंकात्मक अथवा समन्वयात्मक पद्धति से बनाये गये धातुमय, वर्णमय अथवा लिखित यन्त्र में, उसके देवता की स्थापना की जाती है और इन यन्त्रों को पूजन यन्त्र या धारण यन्त्र कहा जाता है।
देश, काल और पात्र का विचार करके जो कार्य किया जाता है वह पूर्णत: सफल होता है। अत: प्रयोग कर्ता को साधना मार्ग में प्रवेश करने के पश्चात् अनेक बातों का सदैव स्मरण रखना चाहिए। जरा सी भूल से प्रयोग विपरीत फलदायक होकर हानि देने लगता है या स्वयं ही निष्फल, प्रभाव हीन रहता है।
यन्त्र अपने आप में एक रहस्य है । इस रहस्य को अनुभव करके ही जाना जा सकता है। यन्त्र की पहली शर्त ही गोपनीयता है। यन्त्र शब्द 'यं' धातु से निष्पन्न होता है। इसका अर्थ सयंमित करना और केन्द्रित करना ही होता है। अभीष्ट सिद्धि के लिए अधिष्ठातृ देवता की शक्ति पर ध्यान लगाने में यन्त्र विशेष यन्त्र विद्या एक गहन विद्या है और पलों में ही यह लाभ देने वाली है। देव, ब्राह्मण, औषधि, मन्त्र, यन्त्र आदि भावना के अनुसार ही फल देते हैं। अत: यदि यन्त्र को सामान्य मानकर लिखा जायेगा तो निश्चय ही उसका फल भी सामान्य ही होगा। यह सोचना केवल मूर्खता ही है कि यन्त्र तो छोटा सा है, ये फल क्या करेगा? क्या परमाणु बहुत बड़ा होता है ? ध्यान से सोचें तो एक अति सूक्ष्म अणु ही तो है जिससे सारा संसार भयप्रद है। यन्त्र को सिद्ध करने के लिए प्रयोजन के अनुसार दिन, तिथि, नक्षत्र, मास आदि समय निर्धारित किये गये हैं। इसके लिखने के लिए स्याही, कलम तथा आधार पत्र भी प्रयोजन के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं।
यन्त्र और उसकी शक्ति पर सदैव श्रद्धा एवं विश्वास रखें क्योंकि श्रद्धा और विश्वास से ही ईश्वर को प्राप्त किया जाता है। सभी कार्य शान्ति एवं सन्तोष से ही फलदायक होते हैं। आतुरता या शीघ्रता से किये जाने वाले कार्यों में विकार का आ जाना स्वाभाविक ही है। चंचल चित्त से होने वाली क्रियाओं में विधि के लोप हो जाने का भय बना रहता है और जब विधि लोप हो जाये तो सिद्धि कहाँ?
जिस भाँति मन्त्र को देवता की आत्मा माना जाता है, उसी भाँति यन्त्र देवता का निवास स्थल माना जाता है। अत: जिस भाँति की सावधानियाँ मन्त्र के प्रयोग काल में स्मरण रखनी होती हैं वहीं सावधानियाँ यन्त्र के प्रयोग काल में आवश्यक हैं। इन सावधानियों का वर्णन नीचे किया जायेगा। चूँकि यन्त्र देवता का स्थल अर्थात् निवास स्थान माने गये हैं। अत: इसके निर्माण में पूर्ण श्रद्धा तथा विश्वास का होना नितांत आवश्यक है। यन्त्रों की रचना करते समय रेखा, चक्र, त्रिकोण आदि का शुद्ध भाव से अवलम्बन करके ही प्रयोग का प्रारम्भ करना चाहिए। प्रयोग में देखा गया है कि यन्त्र निर्माण करते समय बनाई जाने वाली आकृत्ति के कारण साधक के अन्त:करण में अनेक तरह के तूफान आन्दोलित तथा स्पन्दित होते हैं परन्तु इनकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए।


यन्त्रों का प्रयोग पूर्ण लग्न, श्रद्धा एवं विश्वास से करना चाहिए। बिना विश्वास एवं श्रद्धा के यन्त्र से लाभ प्राप्त नहीं होता । यन्त्र में प्रत्येक रेखा की एक माप होती है तथा इन रेखाओं द्वारा निर्मित कोष्ठों आदि का आयतन समान ही होना चाहिए। यन्त्र को रेखांकित करने के बाद यन्त्र के मध्य भाग में संख्या बीज, वर्ण बीज तथा बिन्दु बीज आदि को लिखा जाना चाहिए।
यत्रों में दिव्य तथा आलौकिक शक्तियों का निवास अवश्य ही होता है। तभी तो इसके पूजन करने से, दर्शन से तथा धारण करने से लाभादि हो जाते हैं। यन्त्रादि के प्रयोग करने से जो सावधानियाँ स्मरण रखनी चाहिए, उन्हें लिखा जा रहा है-गुरु पुष्य, रवि पुष्य, ग्रहण, दीपावली तथा होली की रात्रि को शुभ माना जाता है, किया जाने वाला प्रत्येक प्रयोग पूर्णत: प्रभावी होता है। इस समय दिशाशूल, चन्द्र आदि का विचार नहीं किया जाता । अत: साधकों को चाहिए कि उपर्युक्त समय में ही प्रयोग का शुभारम्भ करें।
यत्रादि के प्रयोग में छः कर्म होते हैं जिन्हें कि शान्ति कर्म, वशीकरण कर्म, स्तम्भन कर्म, विद्वेषण कर्म, उच्चाटन कर्म तथा मारण कर्म कहा जाता है। इन कर्मों की देवियाँ भी मानी गई हैं जो कि निम्न भाँति हैं
1. शान्ति कर्म-इस कर्म की देवी रति को माना गया है। भगवती रति, कामदेव की पत्नी हैं।
 2. वशीकरण कर्म-इस कर्म की देवी भगवती सरस्वती को माना गया है।
 3. स्तम्भन कर्म-स्तम्भन कार्य में किये जाने वाले कर्म की देवी लक्ष्मी जी हैं।
4. विद्वेषण कर्म-इस कर्म के लिए भगवती ज्येष्ठा को माना जाता है।
5. उच्चाटन कर्म-इस कार्य के प्रारम्भ में भगवती दुर्गा को पूजने को कहा गया है।
6. मारण कर्म- इस कर्म की देवी महाकाली जी को माना जाता है।

अत: साधकों को चाहिए कि प्रयोग के प्रारम्भ काल में ही कर्म से सम्बन्धित देवि का पूजन करके अपने मत को प्रकट कर दें। अच्छा तो यह रहता है कि पूजन के पहले ही हाथ में जल लेकर विनियोग कर लिया जाये।
कर्म की परिभाषा ऊपर प्रत्येक कर्म की देवी के विषय में समझाया गया है। उन कर्मों की अपनी ही एक परिभाषा भी होती है जो कि निम्नलिखित शान्ति कर्म-जिस प्रयोग के करने से रोगों का, किये कराये का, ग्रहादिकों का निवारण होता है उसे ही शान्ति कर्म कहा जाता है।

  •  वशीकरण कर्म-जिस प्रयोग को करने से दूसरे व्यक्ति जी हजूरी करें ऐसे कर्म को वशीकरण कर्म कहा जाता है।
  • स्तम्भन कर्म-किसी चल रही क्रिया को रोक देना ही स्तम्भन कर्म कहलाता है। 
  • विद्वेषण कर्म-दो गहरे मित्रों के बीच शत्रुता करा देने वाले कर्म को ही विद्वेषण कर्म कहा जाता है।
  • उच्चाटन कर्म-जिस क्रिया के करने से अच्छा भला व्यक्ति भी स्थान छोड़ कर दूर जा बसे, इसे ही उच्चाटन कर्म कहते हैं।
  • मारण कर्म-किसी के भी प्राण ले लेने की क्रिया को मारण कर्म कहा जाता है। कर्म तो छ: ही माने गये हैं, 


-->