शाबर मंत्र, तंत्र यंत्र साधना, गुरु गोरखनाथ परंपरा के प्राचीन सिद्ध मंत्र, वशीकरण, सुरक्षा मंत्र, बाधा निवारण मंत्र और शक्तिशाली लोकपरंपरा आधारित साधनाओं का संपूर्ण ज्ञान। यहाँ आप सरल मंत्र विधि, प्रयोग, तांत्रिक माध्यम और आध्यात्मिक जानकारी आसानी से सीख सकते हैं।

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मंगलवार, 18 नवंबर 2025

Shabar Mantra for Wealth & Business in Hindi

धन-लाभ और व्यापार उन्नति हेतु शक्तिशाली शाबर मंत्र | Shabar Mantra for Wealth & Business in Hindi

🔱 परिचय

व्यापार, नौकरी या धन से जुड़ी रुकावटें जीवन में कई बार तनाव पैदा कर देती हैं।
शाबर मंत्र ऐसे मंत्र हैं जो तेज प्रभाव, सरल भाषा और सिद्ध शक्ति के कारण धन-संबंधी समस्याओं में भी सहायता देने के लिए प्रसिद्ध हैं।

इन मंत्रों का उद्देश्य है—
✔ रुकावट हटाना
✔ भाग्य प्रबल करना
✔ व्यापार में वृद्धि
✔ आर्थिक स्थिरता

इनका उपयोग सकारात्मक और शुभ उद्देश्य से ही करना चाहिए।

धन-लाभ और व्यापार उन्नति के लिए शाबर मंत्र साधना का प्रतीक चित्र
धन-लाभ और व्यापार उन्नति के लिए शाबर मंत्र साधना का प्रतीक चित्र

 


🕉 धन शाबर मंत्र क्यों प्रभावी माने जाते हैं?

• ये मंत्र कमान्ड ऊर्जा (command vibration) पर आधारित होते हैं।
• सामान्य संस्कृत मंत्रों की तुलना में लोकभाषा के कारण आसानी से समझ में आते हैं।
• ध्वनि तरंगें साधक की मानसिकता और ऊर्जा-चक्रों को सक्रिय करती हैं।
• यह साधक को प्रेरणा, अवसर और सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।


💰 1. धन प्राप्ति का प्रसिद्ध शाबर मंत्र

यह मंत्र धन-आकर्षण, रुका हुआ पैसा वापस मिलने और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रयोग होता है।

🌟 मंत्र:

“ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी मातो नमः।
गुरु गोरखनाथ जी की दुहाई,
मेरा धनलाभ शीघ्र करो।”

जाप विधि:

  • गुरुवार या शुक्रवार से शुरू करें

  • पीले वस्त्र पहनें

  • दीपक में घी जलाएँ

  • 5 माला प्रतिदिन (21 दिन)

  • साधना पूर्ण होने पर कुमकुम अर्पित करें


📈 2. व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र (दुकान/ऑफिस के लिए)

यह मंत्र व्यापार में ग्राहकों की आवक, बिक्री में वृद्धि और रुकावट दूर करने के लिए किया जाता है।

🌟 मंत्र:

“जय बाला गुरु गोरखनाथ।
मेरी दुकान-व्यापार में बरकत कर।
आवक बढ़े, लाभ बढ़े, संकट कटे।”

विधि:

  • रोज सुबह दुकान खोलने से पहले 11 बार पढ़ें

  • दुकान/काउंटर पर सिंदूर/केसर का तिलक लगाएँ

  • हफ्ते में एक बार कपूर-लोबान से धूप दें

इस मंत्र से व्यापार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।


🪙 3. रुका हुआ पैसा (देना–लेना) वापस लाने का शाबर मंत्र

कभी-कभी पैसा अटक जाता है या लोग लौटाते नहीं हैं।
यह मंत्र बिना किसी को नुकसान पहुँचाए आपकी धन-वापसी के लिए सहायक माना जाता है।

🌟 मंत्र:

“ॐ नमः आदिनाथाय।
गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
जिसके पास मेरा धन रुका है,
वह स्वयं मन से लौटा दे।”

विधि:

• मंगलवार/शनिवार रात को 108 बार जप
• काला तिल अपने पास रखें
• 11 दिन तक लगातार जप करें


🪔 4. घर में धन की बरकत हेतु शाबर मंत्र

यह मंत्र घर में लक्ष्मी स्थिर रखने, अचानक खर्चे रोकने और समृद्धि बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है।

🌟 मंत्र:

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
गुरु गोरखनाथ रक्षा करो,
घर में धन-धान्य बढ़ाओ।”

विधि:

• शुक्रवार की रात 21 लाल मोमबत्तियाँ जलाएँ
• प्रतिदिन 108 बार मंत्र जप
• घर में शंख/घंटी ध्वनि करें


शाबर मंत्र करते समय महत्वपूर्ण नियम

✔ मंत्र हमेशा सकारात्मक उद्देश्य से करें
✔ शराब, मांस, तामसिक भोजन से बचें
✔ जप के समय मन शांत रखें
✔ लाल/पीला आसन सर्वोत्तम
✔ साधना के बीच गुस्सा, झूठ, अपवित्रता से दूर रहें
✔ किसी भी मंत्र से गलत काम कराने का प्रयास न करें


🏵 परिणाम (Effects) कब मिलते हैं?

• साधक की नीयत, नियम और मनोस्थिति पर निर्भर
• सामान्यतः 7 से 21 दिनों में सकारात्मक परिवर्तन दिखना शुरू हो जाता है
• कभी-कभी तुरंत असर भी दिखाई देता है—
जैसे ग्राहक का बढ़ना, रुका हुआ पैसा चलना, नए अवसर प्रकट होना आदि


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. क्या ये मंत्र सुरक्षित हैं?

हाँ, यदि सकारात्मक उद्देश्य से किए जाएँ।

Q2. क्या बिना दीक्षा शाबर मंत्र कर सकते हैं?

साधारण और सार्वजनिक मंत्र कर सकते हैं, लेकिन कूट मंत्र हेतु गुरु आवश्यक है।

Q3. क्या मंत्र से धन अचानक मिलता है?

मंत्र अवसर खोलते हैं — भाग्य, ऊर्जा और परिस्थितियाँ साधक के पक्ष में आने लगती हैं।


शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

शाबर मंत्र क्या है? सम्पूर्ण जानकारी | Shabar Mantra in Hindi

 🌺 परिचय : शाबर मंत्र क्या हैं?

शाबर मंत्र भारत की अत्यंत प्राचीन लोकपरंपराओं से उत्पन्न मंत्र हैं, जिन्हें नाथ योगियों, सिद्धों, औघड़ों और गुरु गोरखनाथ जी ने जनसाधारण की भाषा में रचा था।
इन मंत्रों की शक्ति इतनी सशक्त मानी जाती है कि इनके लिए कठिन संस्कार या उच्चारण शुद्धि आवश्यक नहीं होती।

शाबर मंत्र सीधे देवी-देवताओं, ग्राम देवताओं और लोक-शक्ति से जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें "तुरंत फलदायी" भी कहा गया है।

प्राचीन लोकपरंपराओं से जुड़ा शक्तिशाली शाबर मंत्र ज्ञान

 


🕉 शाबर मंत्र का उद्गम

शाबर मंत्रों को सबसे अधिक प्रसिद्धि नाथ संप्रदाय से मिली।
गुरु गोरखनाथ, मत्स्येंद्रनाथ और सिद्धों ने इन्हें

  • लोकभाषा

  • बोलचाल की शैली

  • देसी प्रतीकों
    का प्रयोग करके रचा, ताकि हर व्यक्ति इन्हें सरलता से समझकर जप सके।


🔥 शाबर मंत्र की विशेषताएँ

  • कठिन संस्कृत के मंत्रों की तरह नियमबद्ध बाध्यता नहीं

  • साधारण भाषा, पर शक्तिशाली प्रभाव

  • तुरंत फल देने वाले मंत्र

  • सुरक्षा, सफलता, संकट-निवारण आदि में उपयोग

  • जप के लिए कोई विशेष स्थान/समय आवश्यक नहीं (फिर भी प्रातः/रात्रि श्रेष्ठ)


🔱 प्राचीन लोकपरंपरा से जुड़ा शक्तिशाली शाबर मंत्र

नीचे एक लोकपरंपरा आधारित प्रसिद्ध शक्ति व संरक्षण का शाबर मंत्र दिया जा रहा है:

🕉 शक्तिशाली शाबर मंत्र

 
ॐ नमो आदेश गुरुजी का।
गुरु गोरखनाथ जी की दुहाई।
सर्व बाधा दूर होय,
संकट मिटे, विपत्ति टले।
जय गुरु गोरखनाथ।


📌 मंत्र जप विधि

  1. सुबह या रात शांत स्थान पर बैठें।

  2. सामने दीपक या अगरबत्ती जलाएँ।

  3. किसी भी रुद्राक्ष/चंदन की माला का उपयोग करें।

  4. 1 माला (108 बार) रोज़ जप करें।

  5. जप के बाद गुरु गोरखनाथ जी को प्रणाम करें।


🌟 मनोकामना सिद्धि के लिए विशेष उपयोग

  • यदि जीवन में बाधाएँ, रुकावटें या लगातार परेशानी हो

  • नौकरी, व्यवसाय या धन-संकट हो

  • नकारात्मक ऊर्जा या भय हो

यह शाबर मंत्र बहुत तेज़ काम करता है क्योंकि यह लोक-ऊर्जा व गुरु कृपा से जुड़ा है।


⚠ महत्वपूर्ण

यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है।
आपकी साइट के लिए आवश्यक अस्वीकरण—

“यह जानकारी केवल आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए है। इसका कोई दुरुपयोग न करें।”


✨ निष्कर्ष

शाबर मंत्र भारत की प्राचीन लोक-परंपरा का अनमोल खजाना हैं।
इनका जप सरल, प्रभाव तेज़ और फलदायी माना गया है।
यदि इसे श्रद्धा व नियम से किया जाए तो व्यक्ति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव कर सकता है।

रविवार, 10 मार्च 2024

अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना

अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना 

 बहुत दिनों से काफी साधकों ने संपर्क किया देश की विभिन्न जगहों से बहुत लोगों की मांग में ऐसी साधना मांगी गई जो प्रेत योनि में महत्वपूर्ण वा अधिक समर्थ  शक्ति की हो  कोई दो राय नहीं बरहम राक्षस प्रेत योनि में सर्वाधिक सक्षम शक्ति का नाम है इसको सिद्ध करने वाला व्यक्ति कोई भी कार्य करने में सक्षम होता है यह योनि बहुत ही जल्दी प्रसन्न वा क्रोधित भी होती है । हर तंत्र साधक की इच्छा होती है यह साधना सिद्ध करने की । साधक कोशिश भी करते हैं बहुतों ने सिद्ध की बहुत करना चाहते हैं अभी भी और बहुत लोगों ने इसके चक्कर में अपना बहुत कुछ खोया भी है ।।

अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना
अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना 


विशेष ध्यान 

 यह साधना मजबूत इच्छा शक्ति वाले ही करें और खुद की ही जिम्मेदारी से करें । यह योनि बहुत शक्तिशाली है यह कैसा भी रूप ले सकती है सामने आकर डरा सकती है विभन्न प्रकार के छलावे भी यह कर सकते हैं। अगर आप साफ उद्देश्य वा सही नियमों से कोशिश करते हैं तो हो सकता है बिना डरावने अनुभव के भी यह सिद्ध हो जाए ।
पहले थोड़ा जान लें इनका निवास पुराने पीपल के पेड़ों में होता है मंदिर में या शमशान में ऐसे पीपल का होना चाहिए । आकड़े में भी माना गया है पर अधिकतर पीपल का वृक्ष ही है ।


सामग्री 

मिठाई पांच प्रकार की 
बताशे 
5 पान सुपारी
कपूर 5 लौंग के जोड़े 
कुशा का आसन
शराब की बोतल अच्छी
बकरे का मांस भुना हुआ
वस्त्र काले 
दिशा दक्षिण
दिन शुक्रवार 
माला रुद्राक्ष या स्फटिक 

बहुत अच्छा होगा ऐसा पीपल ढूंढे जो शमशान में हो 
1/नियम में धरती शयन है 
2/स्त्री के संपर्क में नहीं आना है।
3/ एक समय ही भोजन करना है ।
4/ अपवित्र रहना है ।
5/ अकेले ही रहना है साधना के दौरान 
6/ जब तक साधना सिद्ध ना हो जाए किसी से कोई बात नहीं करनी 
7/ सिद्ध होने पर कभी भी किसी से कोई जिक्र नहीं करना


मंत्र 
ओम नमो आदेश गुरु जी को सत नमो आदेश
ओम गुरुजी आदेश करो अपना ब्राह्मण कुल में
पैदा हुआ सिद्ध हुआ ज्ञानी हुआ राक्षस गुणी कार्य
किया वो बना सौ प्रेतो का राजा जो अपने को
कहलाए ब्रह्मराक्षस मै रमाऊ उसकी धूनी पचरंगी
भोग लगाओ आदेश लगाओ अपने गुरु का
ब्रह्मराक्षस तोये बुलाओ प्रत्यक्ष होकर मेरे समक्ष
खड़ा हो इतने पर भी मेरे बुलाए मेरे गुरु उस्ताद
के बुलाए हाजिर होकर मेरा अमुक काम ना करें
तो तू अपनी बहन भांजी से हराम करें तू अपने ही
गुरु का खून पीये मेरे वाचे को कुवाचा करें तो तुझे
देवराज इंद्र की आन लगे तुझे ब्रह्मदेव कि आन
देवों के देव महादेव की आन फुरे मंत्र ईश्वरी वाचा
सत नमो आदेश गुरु का



नोट= 
भूल से भी कोई आजमाएं ना जो करने का मन बनाए हुए साधक हैं वही करें और अपने गुरु से राय मशवरा भी कर लें । पर करते समय कब तुम कर रहे हो इसका पता किसी को भी नहीं होना चाहिए ।




शुक्रवार, 3 मार्च 2023

lon chamrin shabar mantra shadhana

लोना चमारी शाबर मंत्र साधना 

 शाबर मंत्र द्वारा लोना चमारी को सिद्ध करने से साधक भूत-प्रेत, जादूटोना, डाकिनी-शाकिनी, जिन्न बाधा, तांत्रिक माया जाल, काला जादू व रक्षा करने हेतु, इन सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करता है।

लोना चमारी शाबर मंत्र साधना 



लोना चमारी शाबर मंत्र 


ॐ नमो आदेश गुरु को


लूना चमारीन जगत की बिजुरी मोती हेल चमके


जो "अमुक" पिंड में जान करे विजान करे तो उस रंडी पे फिरे दुहाई तख़्त सुलेमान पैगंबर की फिरे


मेरी भक्ति


गुरु की शक्ति


फुरो मंत्र इश्वरोवाचा ||


मंत्र साधना विधि :


संध्या के समय पूर्व दिशा की तरफ मुख करके आसन बिछाकर बैठ जाये। सामने एक तेल का दीपक जलाये | साधना के पहले दिन दो लडूड, एक मीठा पान, दो लौंग, दो इलाइची छोटी और सात प्रकार की मिठाई अपने सामने रखे और अगले दिन किसी उजाड़ स्थान पर जाकर फेंक आयें। अब सबसे पहले गुरु पूजन करें फिर गणेश जी का पूजन करें। ऐसा करने के उपरांत रक्षा मंत्र द्वारा अपने चारों तरफ सुरक्षा चक्र बना ले। अब उपरोक्त शाबर मंत्र के अपने सामर्थ्य अनुसार जप करें। प्रतिदिन समान मात्रा में जप करें, किसी दिन कम या किसी दिन अधिक ऐसा बिल्कुल न करें। साधना को 21 दिन तक लगातार करें। 21वें दिन फिर से साधना में दो लडूड, एक मीठा पान, दो लौंग, दो इलाइची छोटी और सात प्रकार की मिठाई अपने सामने रखे और इससे अगले दिन किसी उजाड़ स्थान में फेंक आयें -


बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

Kal bhairav ka sarwarth sadhak shabar mantra

 सर्वार्थ साधक मन्त्र 


ॐ अस्य श्री बटुक- भैरव-स्तोत्रस्य सप्त-ऋषिः ऋषय, मातृका-छन्दः श्री बटुक- भैरवो देवता ममेप्सितसिद्धयर्थं जपे विनियोगः। ॐकाल-भैरों, बटुक- भैरों भूत- भैरों। महा- भैरव महा- भय विनाशनं देवता सर्व-सिद्धिर्भवेत्। शोक-दुःखक्षय-करं निरंजनं, निराकारं नारायणं, भक्ति-पूर्णं त्वं महेशं। सर्व-काम-सिद्धिर्भवेत्। काल-भैरव, भूषण-वाहनं काल-हन्तारूपं च, भैरव गुनी ! महात्मनः- योगिनां महादेवस्वरूपं। सर्वं सिद्धयेत्। ॐकाल-भैरों, बटुक-भैरों भूत- भैरों! महा- भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ त्वं ज्ञानं, त्वं ध्यानं, त्वं योगं, त्वं तत्त्वं, त्वं बीजं, महात्मानं त्वं शक्तिः, शक्ति-धारणं त्वं महादेव-स्वरूपं। सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल-भैरो, बटुकभैरो, भूत- भैरो। महा-भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव! त्वं नागेश्वरं, नाग-हारं च त्वं, वन्दे परमेश्वरं। ब्रह्म-ज्ञानं, ब्रह्म-ध्यानं। ब्रह्म-योगं ब्रह्म-तत्वं, ब्रह्म-बीजं महात्मनः। ॐ काल- भैरव, बटुक-भैरव, भूत- भैरव ! महा- भैरव, महा- भूतविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिभवेत्।।

Kal bhairav ka sarwarth sadhak shabar mantra
 Kal bhairav ka sarwarth sadhak shabar mantra


त्रिशूल-चक्र-गदा-पाणिं शूल-पाणि पिनाक-धृक्। ॐ काल-भैरो, बटुकभैरो भूत- भैरो! महा- भैरव। महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव ! त्वं विना गन्धं विना धूपं, विना दीपं, सर्व-शत्रुविनाशनं। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। विभूति- भूति-नाशाय, दुष्ट-क्षय-कारकं महा- भैरवे नमः। सर्व-दुष्ट-विनाशनं सेवकं सर्वसिद्धिं कुरु। ॐकाल- भैरो बटुक-भैरो, भूत-भरो! महाभैरव महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव! त्वं महा-ज्ञानी, महा- ध्यानी महा-योगी, महा-बली, तपेश्वर! देहि मे सिद्धिं सर्वं। त्वं भैरवं भीम- नादं च नादनम्। ॐ कालभैरो, बटुक- भैरो, भूत- भैरो ! महा- भैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिभवेत्।। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं। अमुकं मारय- मारय उच्चाटय-उच्चाटय, मोहयमोहय वशं कुरु-गुरु। सर्वार्थकस्य सिद्धिरूपं त्वं महा-काल! कालभक्षणं महादेव स्वरूपं त्वं। सर्वं सिद्धयेत् ! ॐ काल-भैरो, बटुक- भैरो भूतभैरो! महा-भैरव, महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ कालभैरव ! त्वं गोविन्द, गोकुला नन्द। गोपालं, गोवर्धनं धारणं त्वं। वन्दे परमेश्वरं। नारायणं नमस्कृत्य, त्वं धाम-शिव-रूपं च। साधकं सर्वं सिद्धयेत्। ॐ काल- भैरो, बटुक- भैरो, भूतभैरो! महा- भैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। 

ॐ कालभैरव ! त्वं राम-लक्ष्मणं, त्वं श्रीपतिसुन्दरं, त्वं गरुड़वाहनं, त्वं शत्रु-हन्ता च। त्वं यमस्य रूपम्। सर्वकार्यसिद्धिं कुरु। ॐ कालभैरव, बटुकभैरो, भूतभैरव! महा- भैरव, महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ कालभैरव! त्वं ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरं त्वं जगत् कारणं, सृष्टि-स्थितिसंहार-कारकं रक्त-बीजं, महा-सैन्यं, महा-विद्या, महा-भयविनाशनम्। ॐ कालभैरो, बटुकभैरो, भूतभैरो! महा- भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ कालभैरव। त्वं आहार मद्य, मांसं च, सर्व-दुष्टविनाशनं, साधकं सर्वसिद्धिप्रदा।। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अघोर-अघोर महाअघोर सर्व-अघोर भैरव काल! ॐ कालभैरो, बटुक-भैरो, भूत-भैरो ! महा-भैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ॐ आं क्लीं क्लीं क्ली। ॐ आं क्रीं क्रीं क्रीं। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं, 5 5 5। क्रू क्रू क्रू। मोहन ! सर्वसिद्धिं कुरु-कुरु। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं। अमुकं उच्चाटय-उच्चाटय। मारय-मारय। धूं, में प्रे, खं खं,दुष्टान् हन हन । अमुकं फट् स्वाहा । ॐ काल भैरो। बटुक-भैरो, भूत भैरो ! महा भैरव महा भय विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् ।।

ॐ बटुक-बटुक योगं च बटुक नाथ महेश्वरः । बटुकं वट वृक्षै बटुकं प्रत्यक्षं सिद्धयेत्। ॐ काल भैरो, बटुक-भैरो भूत- भैरो ! विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् । महा भैरव महाभय ॐ काल भैरव, श्मशान भैरव, काल रूप काल भैरव ! मेरो वैरी तेरो आहार रे । काढ़ि करेजा चखन करो कट-कट । ॐ काल भैरो, बटुकभैरो, भूत भैरो । महा भैरव महाभय विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ नमों हंकारीं वीर ज्वालामुखी ! तूं दुष्टन बध करो। बिना अपराध जो मोहिं सतावे, तेकर करेजा छिदि परै मुख वाट लोहू आवे । को जाने चन्द्र, सूर्य जाने की आदि पुरुष जाने, कामरूप कामाक्षा देवी । त्रिवाच्या सत्य फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॐ काल भैरो, बटुक भैरो भूतभैरो । महा भैरव महा भयविनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् ।।

ॐ काल भैरव ! त्वं डाकिनी शाकिनी, भूत-पिशाचश्च । सर्व- दुष्टनिवारणं कुरु कुरु, साधकानां रक्ष रक्ष । देहि मे हृदये सर्वसिद्धिम्। त्व भैरव - भैरवीभ्यो, त्वं महा भय विनाशनं कुरु । ॐ काल भैरव, बटुकभैरो, भूत- भैरो! महा भैरव महाभय विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् । ॐ आं ह्रीं । पच्छिम दिशा में सोने का मठ, सोने का किवाड़, सोने का ताला, सोने की कुंजी, सोने का घण्टा, सोने की साँकुली। पहली साँकुली अठारह कुल - नाग के बाँधों। दूसरी साँकुली अठारह कुल - जाति के बाँधों। तीसरी साँकुली वैरि- दुष्टन के बाँधों। चौथी साँकुली डाकिनीशाकिनी के बाँधों। पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत के बाँधों। जरती अगिन बाँधों, जरता मसान बाँधों। जल बाँधों, थल बाँधों, बाँधों अम्मर ताई । जहाँ तहाँ जाई । जेहि बाँधि मगावों, तेहि का बाँधि लाओ। वाचा चूकै, उमा सूखै। श्री बावन वीर ले जाये, सात समुन्दर तीर । त्रिवाचा फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा । ॐ काल- भैरो, बटुक-भैरो, भूत- भैरो । महा-भैरव, महाभय विनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत् । ।

ॐ आं ह्रीं । उत्तर दिशा में रूपे का मठ । रूपे का किवार, रूपे का ताला, रूपे की कुंजी रूपे का घण्टा, रूपे की साँकुली । पहिलि साँकुली अठारह कुल नाग बाँधों। दूसरी साँकुली अठारह कुल जाति को बाँधों। तीसरी साँकुली बैरि- दुश्मन को बाँधों। चौथी साँकुली डाकिनी शाकिनी को बाँधों। पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत को बाँधों? जलत अगिन बाँधों, जलत मसान बाँधों। जल बाँधों, थल बाँधों, बाँधों अम्मर ताई। जहाँ भेजें, तहाँ जाई। जेहिं बाँधि मँगावों तेहि का बाँधि लाओ, वाचा चूकै, उमा सूखें। श्री बावन वीर ले जाय, समुन्दर तीर, त्रिवाचा। फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा। ॐ काल-भैरो, बटुक-भैरो, भूत-भरो! महा- भैरव। महाभयविनाशनं देवता, सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ आं ह्रीं। पूरब दिशा में तामे का मठ, तामे का किवार, तामे का ताला, तामे की कुंजी, तामे का घण्टा, तामे की साँकुली। पहली साँकुली अठारह कुल-नाग को बाँधूं, दूसरी साँकुली अठारह कुल-जाति को बाँधूं, तीसरी साँकुली वैरि-दुष्टन को बाँधू। चौथी साँकुली डाकिनीशाकिनी को बाँधू, पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत को बाँधूं। जलत अगिन बाँचूं, प्रेत को बाँधूं। जलत अगिन बाँधू जलत मसान बाँचूँ। जल बाँधों थल बाँधों, बाँधों अम्मर ताई। जहाँ भेनँ, तहाँ जाई। जेहिं बाँधि मगावों। वाचा चूके, उमा सूखै श्री बावन वीर ले जाये सात समुन्दर तीर। त्रिवाचा फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा। ॐ काल- भैरो, बटुक-भैरो, भूत- भैरव। महाभैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ आं ह्रीं। दक्षिण दिशा में अस्थि का मठ, अस्थि का किवार, अस्थि का ताला, अस्थि की कुंजी, अस्थि का घण्टा, अस्थि की साँकुली। पहली साँकुली अठारह कुल-नाग को बाँधों, दूसरी साँकुली अठारह कुल जाति को बाँधों, तीसरी साँकुली वैरि-दुष्टन को बाँधों, चौधी साँकुली डाकिनीशाकिनी को बाँधों। पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत को बाँधों। जलत अगिन बाँधों, जलत मसान बाँधों, जल बाँधों, थल बाँधों, बाँधों अम्मतरताई। जहाँ भेजूं तहाँ जाई। जेहि बाँधि मगावों, तेहि का बाँधि लाओ। वाचा चूकै, उमा सूखै श्री बावन वीर ले जाय सात समन्दर तीर। त्रिवाचा फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ॐ काल- भैरो, बटुक- भैरो, भूत- भैरो। महा- भैरव महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल- भैरव! त्वं आकाशं, त्वं पातालं। त्वं मृत्यु-लोकं। चतुर्भुजं, चतुर्मुखं। चतुर्बाहुँ, शत्रु-हन्ता च त्वं भैरव ! भक्ति पूर्ण कलेवरम्। ॐ काल- भैरो, बटुक- भैरो भूत- भैरो ! महा- भैरो महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।।

ॐ काल- भैरव त्वं। वाचा चूकै उमा सूखै, दुश्मन मरे अपने घर में। दुहाई काल-भैरव की। जो मोर वचन झूठा होय, तो ब्रह्मा के कपाल फूटै शिव जी के तीनों नेत्र फटै, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ॐ काल-भैरव बटुक-भैरव, भूत-भैरव ! महा- भैरव, महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव! त्वं ज्ञानी, त्वं ध्यानी त्वं योगी, त्वं जंगम स्थावरं त्वं सेवित सर्व-काम-सिद्धिभवेत्। ॐ काल-भैरो, बटुक- भैरो, भूत-भैरो! महा-भैरव महा-भयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल-भैरव! तुम जहाँ जाहु। जहाँ दुश्मन बैठ होय, तो बैठे को मारो। चलत होय, तो चलते को मारो। सोवत होय, तो सोते को मारो। पूजा करत होय, तो पूजा में मारो। जहाँ होय, तहाँ मारो। व्याघ्र लै भैरव, दुष्ट को भक्षौ। सर्प ले भैरव! दुष्ट को उँसो। खड्ग से मारो, भैरव ! दुष्ट को। शिर गिरैवान से मारो, दुष्टन करेजा फटै। त्रिशूल से मारो, शत्रु छिदि परै मुख वाट लोहू आवे। को जाने? चन्द्र सूरज जाने की आदि-पुरुष जाने। काम-रूप कामाक्षा देवी। त्रिवाचा सत्य फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा। ॐ काल-भैरो, बटुक-भैरो, भूत-भैरो! महा-भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल- भैरव ! त्वं वन्दे परमेश्वरं ब्रह्म-रूपं, प्रसन्नो भव। गुनि, महात्मानां महादेवस्वरूपं सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल-भैरव ! त्वं भूतस्य भूत-नाथश्च। भूतात्मा भूतभावनः। त्वं भैरव, सर्व-सिद्धिं कुरु-कुरु। ॐकाल-भैरो बटुक-भैरो, भूत-भैरो। महा- भैरव महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। - 

    इस जंजीरे की सिद्धि के लिए किसी पर्वकाल में या ग्रहणकाल में श्री भैरव जी विषयक सभी नियमों का पालन करते हुए जप व हवन करें तथा इसका नित्य प्रतिदिन एक बार जप करने से साधक की सभी मनोकामनाएं भैरवकृपा से पूरी होती हैं।



शुक्रवार, 23 सितंबर 2022

Navratri Puja and Shabar Mantra

  Navratri Puja and Shabar Mantra

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा आराधना होगी। Navratri 2022 Shubh Muhurat And Puja Mantra: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर 2022 से को है और इसी तिथि से अगले नौ दिनों तक  नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।  इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा आराधना होगी। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर देवी दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन हाथी की सवारी के साथ होगा। नवरात्रि पर दुर्गा उपासना, पूजा,उपवास और मंत्रों के जाप का विशेष महत्व होता है।

Navratri Puja and Shabar Mantra
Navratri Puja and Shabar Mantra

शारदीय नवरात्रि 2022 घटस्थापना मुहूर्त (Shardiya Navratri 2022 Ghatsthapana Muhurat Timing)

प्रतिपदा तिथि आरंभ- 26 सितंबर 2022,सुबह 03 बजकर 23 मिनट पर 


प्रतिपदा तिथि का समापन - 27 सितम्बर 2022, सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर

घटस्थापना सुबह का मुहूर्त - 06.17 AM - 07.55 AM
अवधि - 01 घण्टा 38 मिनट

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त - 11:54 AM - 12:42 PM
अवधि - 48 मिनट


'नवार्ण मंत्र'-

 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' का महत्व

मां दुर्गा जी की साधना-उपासना के क्रम में,नवार्ण मंत्र एक चमत्कारी महामंत्र है। इस नौ अक्षर के दिव्यमंत्र में नौ ग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति समाई हुई हैं,जिसके माध्यम से भक्त सभी क्षेत्रों में पूर्ण सफलता आसानी से प्राप्त कर सकते हैं एवं भगवती दुर्गा का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। दुर्गा माता की इन नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए 'नवार्ण मंत्र'- 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' सबसे श्रेष्ठ है। इसका हर एक अक्षर मां दुर्गा की एक शक्ति से संबंधित है। साथ ही एक-एक ग्रह से भी इनका संबंध है। यह माता भगवती दुर्गा जी के तीनों स्वरूपों माता महासरस्वती, माता महालक्ष्मी व माता महाकाली की एक साथ साधना का पूर्ण प्रभावक बीज मंत्र है और साथ ही माता दुर्गा के नौ रूपों का संयुक्त मंत्र है और इसी महामंत्र से नौ ग्रहों को भी शांत किया जा सकता है। नवार्ण मंत्र का जप रुद्राक्ष माला पर करना चाहिए। नौ अक्षरों के नवार्ण मंत्र के पहले ॐ अक्षर जोड़कर दुर्गा सप्तशती में इसे दशाक्षर मंत्र का रूप दे दिया गया है। ॐ अक्षर के साथ दशाक्षर मंत्र भी नवार्ण मंत्र की तरह ही फलदायक होता है


  • नवार्ण मंत्र के पहले अक्षर 'ऐं' का संबंध दुर्गाजी के पहले स्वरूप या शक्ति  माँ शैलपुत्री से है जिनकी प्रथम नवरात्रि को उपासना की जाती है। ऐं अक्षर सूर्य ग्रह को भी नियंत्रित करता है।
  • दूसरा अक्षर 'ह्रीं'है,जिसका संबंध दुर्गाजी की दूसरी शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी से है,इनकी पूजा दूसरे नवरात्रि को होती है। ये चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है।
  • तृतीय अक्षर 'क्लीं' दुर्गाजी की तृतीय शक्ति माँ चंद्रघंटा से संबंधित है जिनकी पूजा तीसरे दिन की जाती है, इस बीज मंत्र में मंगल ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
  • चतुर्थ अक्षर “चा” से माता दुर्गा के चौथे स्वरुप देवी कुष्मांडा की उपासना की जाती है,इस बीज मंत्र में बुध ग्रह को नियंत्रित करने की सामर्थ्य है।
  • पंचम बीज मंत्र “मुं” से माता दुर्गा की पंचम शक्ति मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है,इस बीज मंत्र में बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
  • छठा बीज मंत्र “डा” से माता दुर्गा की षष्ठ शक्ति माता कात्यायनी की उपासना की जाती है,इसमें शुक्र ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
  • सप्तम बीज मंत्र “यै” से माता दुर्गा की सातवीं शक्ति देवी कालरात्रि की उपासना की जाती है,इसमें शनि ग्रह को नियंत्रित करने का सामर्थ्य है।
  • अष्टम बीज मंत्र “वि” से माता दुर्गा की आठवीं शक्ति अन्नपूर्णा देवी महागौरी की उपासना की जाती है,इस मंत्र में राहु ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति है।
  • नवम बीज मंत्र “चै” से माता दुर्गा की नवीं शक्ति माता सिद्धीदात्री की उपासना की जाती है,इस बीज मंत्र में केतु ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।


नवरात्रि पूजा मंत्र सिद्धि के अचूक उपाय तथा नवदुर्गा बीजमंत्र | नौ दिन की नौ देवी के नौ मंत्र


नवरात्रि पूजा मंत्र Navratri Puja mantra

शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:।
ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
चन्द्रघण्टा : ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
कूष्मांडा : ऐं ह्री देव्यै नम:।
स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है । पौराणिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों तक शक्ति की देवी दुर्गा की पूजा-आराधना का विधान है.


नवरात्र के दौरान नव दुर्गा के इन बीज मंत्रों की प्रतिदिन की देवी के दिनों के अनुसार मंत्र जाप करने से मनोरथ सिद्धि होती है | नौ देवियों के दैनिक पूजा के बीज मंत्र-


नवरात्री की पूजा Navratri pooja
1️⃣.माता शैलपुत्री- ह्रीं शिवायै नम:।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता दुर्गा का प्रथम रूप है. इनकी आराधना से कई सिद्धियां प्राप्त होती हैं.


प्रतिपदा को मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्ये नम:’ की माला दुर्गा जी के चित्र के सामने यशाशक्ति जप कर घृत से हवन करें ।

2️⃣. माता ब्रह्मचारिणी- ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।

माता दुर्गा का दूसरा स्वरूप पार्वती जी का तप करते हुए हैं. इनकी साधना से सदाचार-संयम तथा सर्वत्र विजय प्राप्त होती है. चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन पर इनकी साधना की जाती है।

द्वितिया को मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:’, की माला दुर्गा जी के चित्र के सामने यशाशक्ति जप कर घृत से हवन करें.

3️⃣. माता चन्द्रघण्टा- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
माता दुर्गा का यह तृतीय रूप है. समस्त कष्टों से मुक्ति हेतु इनकी साधना की जाती है.

तृतीया को मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:’ की एक माला जप कर घृत से हवन करें.

4️⃣. माता कूष्मांडा- ऐं ह्री देव्यै नम:।
यह मां दुर्गा का चतुर्थ रूप है. चतुर्थी इनकी तिथि है. आयु वृद्धि, यश-बल को बढ़ाने के लिए इनकी साधना की जाती है.

चतुर्थी को मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै नम:’ की एक माला जप कर घृत से हवन करें.

5️⃣. माता स्कंदमाता- ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
दुर्गा जी के पांचवे रूप की साधना पंचमी को की जाती है. सुख-शांति एवं मोक्ष को देने वाली हैं.

पांचवें दिन मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नम:’ की एक माला जप कर घृत से हवन करें.

6️⃣. माता कात्यायनी- क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
मां दुर्गा के छठे रूप की साधना षष्ठी तिथि को की जाती है. रोग, शोक, संताप दूर कर अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष को भी देती हैं.

छठे दिन मंत्र– ‘ॐ क्रीं कात्यायनी क्रीं नम:’ की एक माला जप कर घृत से हवन करें.

7️⃣. माता कालरात्रि – क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
सप्तमी को पूजित मां दुर्गा जी का सातवां रूप है. वे दूसरों के द्वारा किए गए प्रयोगों को नष्ट करती हैं.


सातवें दिन मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:’ की एक माला जप कर घृत से हवन करें.

8️⃣.माता महागौरी- श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
मां दुर्गा के आठवें रूप की पूजा अष्टमी को की जाती है. समस्त कष्टों को दूर कर असंभव कार्य सिद्ध करती हैं.

आठवें दिन मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:’ की एक माला जप कर घृत या खीर से हवन करें.

9️⃣. माता सिद्धिदात्री – ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
मां दुर्गा के इस रूप की अर्चना नवमी को की जाती है. अगम्य को सुगम बनाना इनका कार्य है.

नौवें दिन मंत्र– ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नम:’ की एक माला जप कर जौ, तिल और घृत से हवन करें.


 नवरात्रि में विशेष लाभप्रद दुर्गा सिद्ध शाबर मन्त्र


ऐसी विकट परिस्थिति में जैसे- व्यापार में हानि, शत्रुओं का कोप, नौकरी में रुकावट, कर्ज अथवा तंत्रबंधन आदि परेशानियां । इन सबसे आदिशक्ति मां दुर्गा का यह दिव्य लक्ष्मीकारक शाबरमंत्र अमृत के समान है । इस शाबर मंत्र को नवरात्रि काल, ग्रहणकाल या फिर समस्या अधिक बढ़ने पर कभी भी जप करके सिद्ध किया जा सकता हैं । इस मंत्र को सवालाख की संख्या में जप करने का शास्त्र में विधान बताया गया हैं । इसे किसी भी  मन्दिर या फिर एकान्त पवित्र स्थान में सम्पन्न करना चाहिए । जप पूरा होने के बाद इसका दशांश यज्ञ करके 9 वर्ष से छोटी कन्याओं को भोजन कराना चाहियें ।

मां दुर्गा त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, और महेश की ही महाशक्ति कही जाती हैं । जो भी श्रद्धा पूर्वक भक्तवत्सला, करुणामयी, आद्यशक्ति मां जगदम्बा का धन वैभव की देवी माता महालक्ष्मीरूप में पूजन और आवाहन करते हुए में दुर्गा के इस शाबर मंत्र की जप साधना करता है उसे मां धनवान बना देती हैं । इस विधि से साधक घोर दरिद्रता एवं दुःखों से मुक्त होकर सुख-सम्पत्ति एवं दीर्घा यु प्राप्त करता है ।


मन्त्र :-

 “ॐ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंह-वाहिनी। 

बीस-हस्ती भगवती, रत्न-मण्डित सोनन की माल। 

उत्तर-पथ में आप बैठी, हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि-सिद्धि।

 धन-धान्य देहि देहि, कुरु कुरु स्वाहा।”


विधिः - उक्त मन्त्र को नवरात्र की प्रतिपदा से शुरू कर महानवमी तक करें ! माँ दुर्गा का पूजन कर रोजाना एक माला जप कर सिद्ध कर लें। फिर श्रद्धा से 9 जप रोजाना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। लक्ष्मी प्राप्त होती है, नौकरी में उन्नति और व्यवसाय में वृद्धि होती है।

 

Kanya pujan कन्या पूजा 

कन्या पूजन, नवरात्रि के दौरान एक महत्वपूर्ण काम है जिसमे छोटी लड़कियों देवी माँ का रूप मानते हुए उनका सम्मान और पूजा की जाती है। कन्या पूजन में कन्या को देवी रूप देवी दुर्गा के अवतारों को माना जाता हैं। यह भी दावा किया जाता है कि देवी दुर्गा ने राक्षस कालसुर से लड़ने के लिए एक युवा लड़की का रूप धारण किया था। नतीजतन, कन्यायों के पास आज भी सार्वभौमिक रचनात्मक शक्तियां है जिनके आशीवार्द से आपकी सब समस्याएं खत्म हो सकती है।

कन्या पूजा, जिसे कंजक पूजा भी कहा जाता है, आमतौर पर नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन की जाती है। देवी दुर्गा के नौ अवतार, जिन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है, को नौ छोटी लड़कियों के रूप में पूजा जाता है। कुछ मंदिरों या पूजा संस्थानों में कन्या पूजन नवरात्रों में रोज़ होता है, यह आप माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू कश्मीर में आप देख सकते है। घरों में कन्या पूजन नवरात्रे के आंठवे दिन या नवें दिन व्रत या पूजा अनुष्ठान किया जाता है।

कन्या पूजा एक हिंदू रिवाज़ है जो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में प्रचलित है। रामनवमी पर कुछ राज्य इस प्रथा को अंजाम देते हैं।

नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान, कन्या पूजा एक प्रमुख रीती रिवाज़ है। कन्या पूजा और कुमारिका पूजा कुमारी पूजा के अन्य नाम हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में धार्मिक ग्रंथों में कन्या पूजा की का उल्लेख है और इसे विधि पूर्वक करने की शाश्त्र आज्ञा भी देता है। नवरात्रि के पहले दिन केवल एक कन्या की पूजा करनी चाहिए और जैसे जैसे नवरात्रे का दिन बढ़ते जाते है उसी प्रकार प्रतिदिन कन्यायों की संख्या बढ़ाकर पूजा करनी चाहिए।

दूसरी ओर, कई लोग एक ही दिन कुमारी पूजा करना पसंद करते हैं, जैसे अष्टमी पूजन या नवमी पूजन। उस दिन लोग अपने घर में नवरात्रे अनुसार ८ या ९ कन्यायों को अपने घर बुलाकर उनकी पूजा करते है।

भक्त इस दिन छोटी बच्चियों को अपने घर बुलाकर उपवास रखते हैं। माना जाता है कि यह अनुष्ठान दुर्गा देवी की प्रशंसा व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालराती, महागौरी और सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा के नौ दिव्य रूपों के अवतार के रूप में पूजा जाता है।

कंजक के साथ अब छोटे लड़के भी लड़कियों के साथ जाते हैं। जिनमे हनुमान जी के बालरूप या माता के रक्षाक के रूप में जाना जाता है।

भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि का नौवां दिन भक्तों की मनोकामना पूरी करता है और जो नौ दिन का व्रत रखते हैं और नवरात्रि के अंत में कन्याओं की पूजा करते हैं, उन्हें माँ भगवती की कृपा जरूर प्राप्त होती है।

एक कन्या की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है, दो कन्याओं की पूजा करने से ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है और तीन कन्याओं की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। बच्चे अधिकार और ज्ञान का पक्ष लेते हैं, और नौ कन्या पूजा को सर्वोच्चता का आशीर्वाद माना जाता है।

Shri Lalita Sahasranama-श्री ललिता सहस्त्रनाम

धन प्राप्ति के लिए मंत्र-


'सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:, मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:'

 नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के इस मंत्र का जाप से धन से जुड़ी समस्या का समाधान मिलता है.

संकटों से छुटकारा पाने के लिए



'शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे, सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते'. चैत्र नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती के इस मंत्र के जप से जीवन में आ रही तमाम समस्एं दूर होती हैं.

सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति के लिए


'देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्, रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि'. धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में इस मंत्र के जाप से रोग दूर होते हैं. साथ ही, सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

हर तरह के कल्याण के लिए


'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते'. शुभ दिनों में इस मंत्र के जाप से हर तरह के कल्याण की प्राप्ति होती है.

पसंदीदा जीवनसाथी के लिए


'पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्, तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्' मंत्र का जाप करने से मनचाहे जीवनसाथी  की प्राप्ति होती है. साथ ही, दांपत्य जीवन से जुड़ी समस्या खत्म हो जाती है.



मंगलवार, 20 सितंबर 2022

Kal bhairw ridhi sidhi mantra

कालभैरव ऋद्धि- सिऋिप्रदायक

 

Kal bhairw ridhi sidhi mantra
Kal bhairw ridhi sidhi mantra

मन्त्र'

ॐ सतनाम आदेश गुरु को 

ॐ पहला तारा ईश्वर तारा, 

जहां हनूमान माराठंकारा, कालभैरूं काली रात, 

काली पुतली काजल रात कालो कलुओ आधी रात,

चलतो बाट: चित्तकर उलट मार पुलट मारहो हनुमंतवीर हाल आव, 

सिताब आव सवापहरमें आव, सवा घड़ीमें आव, 

जा किसकी खाटपर ऋद्धि लाव सिद्धि लाव सूतीकोजगाय लाव बैठीको उठाय लाव, 

चलतीको बुलाय लाव, हो हनुमन्तवीर हमारे कार्य मेंढील करोगे 

तो सदाशिवकी दुहाई माता अंजनीकी दुहाई सीधा पाँव धरोगे 

तो बत्तिसधारको दूध हराम करोगे, मेरी भक्ति गुरुकी शक्ति चलो मन्त्र ईश्वरोवाच ।।

 

 

विधान– रविवार के दिन कड़ाही में सवा पाव घी में रोट (आटा-गुड़मिश्रित एक पक्वान्न) बना लें। उसे मंगलवार के दिन कालभैरव को चढ़ावें तो ऋद्धि-सिद्धि मिलती है।

मंगलवार, 13 सितंबर 2022

Pitru Suktam Path Mantra

 Pitru Suktam Path Mantra

गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ दोष निवारण के लिये पितृ-सूक्तम् का पाठ करना अत्यंत लाभकारी है। साथ ही इसके पाठ से पितृों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गरुड़ पुराण में पितृ पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। श्राद पक्ष हर साल अशिवन माह लगभग 15 दिनों के लिए आते हैं। इन लोगों में श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है। आपको बता दें कि इस साल श्राद्ध पक्ष 10 सितंबर से शुरू हो रहा है जो कि 25 सितंबर तक रहेगा। इस दौरान लोग ब्राह्मणों को भोजन और दान- दक्षिणा देकर पितृों का आशीर्वाद पाते हैं। वहीं पितृदोष निवारण के लिये पितृ-सूक्तम् का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह पाठ शुभ फल प्रदान करने वाला होता है जो हर किसी को लाभ देता है। शास्त्रों के अनुसार पितृ-सूक्तम् का पाठ तेल का दीपक जलाकर संध्या के समय किया जाता है। इसे श्राद्ध पक्ष के अलावा अमावस्या या पूर्णिमा में किया जाता है। इसका पाठ करने से पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही पितृों के आशीर्वाद से घर में सुख- शांति का वास रहता है 
 
Pitru Suktam Path Mantra
Pitru Suktam Path Mantra



॥ पितृ-सूक्तम् ॥

उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुम् यऽ ईयुर-वृका ऋतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥1॥ 

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।
तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥2॥
ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः। 

तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥3॥
त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।
तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥4॥
त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।
वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्गु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥5॥

 त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।
तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥6॥
बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकमा जुषध्वम्।
तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥7॥
आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।
बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥8॥ 

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।
तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥9॥ 

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।
अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥10॥ 

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः। 

अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥11॥ 

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।
तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥12॥ 

अग्निष्वात्तान् ऋतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।
ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥13॥
आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।
मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥14॥
आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे माय।
पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥15॥


अमावस्या या पूर्णिमा अथवा श्राद्ध पक्ष के दिनों में दोपहर या संध्या के समय तेल का दीपक जलाकर पितृ-सूक्तम् का पाठ करने से पितृदोष की शांति होती है और सर्वबाधा दूर होकर उन्नति की प्राप्ति होती है.

बुधवार, 31 अगस्त 2022

Manokamna bhairw shabar mantra

 मनोकामनादाता भैरव मन्त्र 

Manokamna bhairw shabar mantra
Manokamna bhairw shabar mantra



ॐ काली-कंकाली महाकाली के पुत्र कंकाल भैरूँ। 

हुकुम हाजिर रहे।मेरा भेजा काल करे। 

मेरा भेजा रक्षा करे। 

आन बाँचूँ, वान बाँचूँ चलतेफिरते औसान बाँधू दसो सुर बाँधू, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा बाँचूँ।

 फूल में भेजें, फूल में जाय। कोठे जो पड़े थर-थर काँपे। 

हल-हल हले, गिरगिर पड़े। उठ-उठ भागे, बक-बक बके। 

मेरा भेजा सवा घड़ी, सवा पहर। 

सवा दिन, सावा मास, सवा बरस कूँ बावला न करे, तो माता काली की शय्या पर पग धरे। 

वाचा चूके, तो उमा सूखे। वाचा छोड़, कुवाचा करे तो धोबी की नांद चमार के कुण्ड में पड़े। 

मेरा भेजा बावला न करे। तो रुद्र के नेत्र की ज्वाला कढे। 

शिर को लटा टूटि भूमि में गिरे। 

माता पार्वती के चीर पर चोट पड़े।

 बिना हुकुम नहीं मारना हो तो काली के पुत्र कंकाल- भैरूँ।

 फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।। सत्य नाम गुरु जी का।।


इस मन्त्र का अनुष्ठान दीपावली अथवा ग्रहणकाल में श्री भैरव जी विषयक नियमों का पालन करते हुए चौमुखा दीपक जलाए, त्रिकोण एक चौका लगाकर दक्षिण की ओर मुख करके बैठें। जप समय काली-कनेर के फूल, लड्ड, लौंग जोड़ा, मांस, मंदिरा और पुष्प-माला अपने समक्ष रखकर इस मन्त्र की 11 माला का जप करें एवं दशांश हवन करें तो यह मन्त्र सिद्ध हो जायेगा। आवश्यकता के वक्त श्री भैरव जी से प्रार्थना करें तो मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।


सोमवार, 22 अगस्त 2022

Jod Tod ka shabar mantra

 जोड़-तोड़ का शाबरी मन्त्र 

यह मन्त्र सभी प्रकार के अभिचार-प्रयोगों को जोड़ने व तोडने की क्षमता रखता है।  यदि किसी व्यक्ति पर 'अभिचार - प्रयोग' (मन्त्र - मूठ, चौकी, घाल–'शाबर-मन्त्र-प्रयोगों' की विशेष मारण-क्रिया) किया हो, तो उसे इस मन्त्र से तीन दिन तक झाड़ा दे। 'अभिचार-प्रयोग' नष्ट हो जाएगा।


जोड़-तोड़ का शाबरी मन्त्र
Jod Tod ka shabar mantra

 

 

 गर्सत - गर्सत गर्सति गर्सा। हर शहरु गर लखन गर तन्त, गर मन्त, गर आँखें। गर्जनगर्जन बहरु झण्डार, सुनोगी बरुन बन हरुन-हरुन, बस्सी धरुन तू लागू करतार । खेड़े या मोती उजगड़ पड़े, मुझ बुढ़िया दुनियादार । मारु डङ्का, उतरे डङ्का, मत कर लङ्का, करूंगा गुरु का सबक साँचा । बैठी मुनादई रानी, तू लाढ़ करे बसी पानी। पानी प्याऊँ चुल्ल तीन । काया रखं बस्सी को, छीन मगरी का पानी। औलादी चले ये मन्त्र मेरा बैग चले । किशन सुरूपी बन पहरुन निरबस घर जाऊँ। अरे देवता छेतरी! तू जन्नो अमावस की रात में, बावन तेरे बाप का, तू मेरा बाका राई, तू दान मत में मेरा, मैं वचन ना सेऊँ तेरा, काल का डाँट पड़े। बोल का साथी कोन? चन्द्रमा । देवता दीन के साथी होते हैं, दिन के नहीं। काल का डॉट पड़े। बोल का साथी कोन? सूर्य देवता। काल का डाँट पड़े। बोल का साथी कोन ? धरती माता। धरती माता बोल दे, बुलाए दे, बोल देती नहीं। राजा बासक की बैठी कचहड़ी। कोन-कोन बैठे हैं ? एक लाख चीहाड़ों में सवा पहर को आप ही बैठे हैं। अरे चीहाड़ो! बस, कहाँ पाया? बिस महवा, बिस खम्पा, बिस शिबया, बिस बङ्गाल । किशन सुरूपी बन पहरुन, निरबस घर जाऊँ। यह मन्त्र ईश्वर वाचा, मेरे गुरु का सबक साँचा, हो जावे बस गोबर माई।


विधि-

 यह मन्त्र सभी प्रकार के अभिचार-प्रयोगों को जोड़ने व तोडने की क्षमता रखता है। इसे सिद्ध करने की विधि यह है कि किसी विशेष पर्व की रात्रि में साधक अपने इष्ट - देव की पूजार्चना करे। इसके बाद उक्त मन्त्र का108 बार जप करे । मन्त्र सिद्ध हो जाएगा। नित्य-पूजा में इस मन्त्र को 11 या 21 बार अवश्य जप लेना चाहिए। इससे मन्त्र की ऊर्जा बनी रहेगी।

यदि किसी व्यक्ति पर 'अभिचार - प्रयोग' (मन्त्र - मूठ, चौकी, घाल–'शाबर-मन्त्र-प्रयोगों' की विशेष मारण-क्रिया) किया हो, तो उसे इस मन्त्र से तीन दिन तक झाड़ा दे। 'अभिचार-प्रयोग' नष्ट हो जाएगा। अथवा 'अभिचार-प्रयोग से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर एक नए मिट्टी के बड़े पात्र में सात प्रकार की मिठाई, उड़द की दाल के कुछ भल्ले, एक नीम्बू, एक सुई, दो लौंग व थोड़ी-सी मद्य डालकर, उस सब पर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाए-दीपक में थोड़ा सिन्दूर डाल ले और तब मन्त्र पढ़ते हुए सात बार उतारा कर मन्त्रोच्चारण के बाद कहे  "जैसा आया, वैसा जा । जहाँ से आया, वहाँ जा। जिसने भेजा, उसको जा-खा।" इसके बाद उक्त 'उतारे' को उसी समय चौराहे पर रखवा दे। इस विधि से अभिचार-प्रयोग-कर्ता अपने ही भेजे गए प्रयोग के सङ्कट में पड़ जाएगा। यह कार्य रात्रि में ही करे।


सोमवार, 8 अगस्त 2022

bhoot pret chudail chudane ka shabar mantra

 भूत-प्रेत-चुडैल छुड़ाने का मन्त्र 

 आज हम आपको बहुत ही खतरनाक भूत प्रेत चुडैल को छुडाने का मंत्र के बारे में बातने जा रहा हूॅ जिससे इस मंत्र का प्रयोग कर भूत प्रेत चुडैल को दूर कर सकते हो ।

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पीर साहेब भेजा पैगाम । 

पञ्छी उतै चले, औलिया वीन के बीच । 

मिलै कलमा सारी, मैं अन्धा कुछ गुण न जानौं। 

जो गुण पावो, जपो हृदय लगाय। 

कलमा पढ़त मोहि कल जो पड़तह, एवे कलमा कल नाहि कर झगड़ा। 

क्रोध में आवो, मारो उसका प्राण ।

 हसन हुसैन अली कर बेटा, गाजी मियाँ, चले फुलवरिया। 

जहां देखें दुपरिया गंवाई। 

लह-लह लह-वर काँपै, जैसे काँपै हार फुलाने । 

सिर पीर बला बोलेऊ औलिया कर नाउ । 

दोहाई गाजी मियां की, दोहाई  लह्वर की, दोहाई कलमा सारी की।


विधि : मिट्टी का चौका वृहस्पति के दिन लगाए। उस पर फूल की माला चढ़ावे; रोरी चढ़ावे। उपरि - लिखित मन्त्र पढ़कर लोहबान की धूप तीन बार डाले। घी का दीपक एक बत्ती का जलाए। दीपक को देखते ही भूत - प्रेतादि - प्रस्त व्यक्ति बकने लगेगा और सब हाल बताएगा।

शुक्रवार, 5 अगस्त 2022

sarv kariy shidhi shabar maha mantra

 सर्व-कार्य-सिद्धि-दायक शाबर महा-मन्त्र

 

छुः छुः यह मन्तर । देखो यह जन्तर । 

बड़ा हय धन्तर। बाले अस्वतर ।

 अच्छा हय जन्तर । उछले समन्दर । 

काबिल यह तन्तर । फीके सब बन्दर । 

जे बी हय भणतर । सब ही से बलतर ।

 रमुज का मणतर । कयसा हय सुन्दर । 

टाले जो दुःख, रोग, भङ्गे वो नहि भोग । 

जमाया महा-जोग, देखिए जी तम-लोक । 

बड़ा तमासा, मचाया वासा । घल और घमासा, बजता यह तासा।

 मारू जो एक काल, धनेगा ऐसी ताल । 

वोह आगिया बैताल है और खतेरयार है। 

बड़ाजा हनुमान, करीम सुलेमान ! हकीम जी लुकमान और जीन परस्तान ।

 जादू का हफत खान, देवो माजार दान । 

जनी कोहेस्तान, वैसी ओ मस्तान । 

सब बश हो जाए, सब गम खो जाए, दील सुख हंस जाए, सब गम हट जाए। 

आवो जी देखो, हंसो और नाचो। एसो हय साचो, नान कहे तमासो। 

सज्जने साध्यो, नजर से यहाँ फेंको, सुख-सम्पत्ति ने सन्तति । 

सो कोई देखो। गुरू की शक्ति, मेरी भक्ति । 

फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा । सत्य गुरू का मन्त्र साचा ।

sarv kariy shidhi shabar maha mantra
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विधि : 

प्रातः काल नित्य-क्रिया से निवृत्त होकर सूर्य नारायण के सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हों और इस मन्त्र का 7 बार जप करें। तब अपना कार्य प्रारम्भ करे। अपनी जो मनेच्छा हो, उसका सदा स्मरण करता रहे । सूर्य देव की कृपा से सर्व - कार्य - सिद्धि होगी। ‘जप'-कर्ता की शक्ति बढ़ेगी। ईप्सित कार्य पूर्ण होंगे।

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मंगलवार, 2 अगस्त 2022

hinglaj devi ka shabar mantra

  हिङ्गलाज देवी का शाबर मन्त्र 

आज हम आपको मां हिगलाज माता के बारे में एक बहुत ही प्रभावशाली व शक्तिशाली मां हिगलाज के शाबर मंत्र के बारे में बताने जा रहे है यह मां हिगलाज माता का दुर्लब शाबर मंत्रों में से एक शाबर मंत्र है जिसका प्रयोग कर माता हिगंलाज का आशीर्वाद प्राप्त कर पायेगे। जो आपके जीवन में आपने वाले अनकों कष्टों को दूर कर पायेगे।

 

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ॐ निरङ्कार भवानी । 

इन्दर की बेटी, ब्रह्मा की साली। 

दोनों हाथ बजावे ताली, जा बैठी पीपल की डाली।

 इन्द्र मोहूँ, ब्रह्मा मोहूं, मोहूँ सारी दुनिया। 

दुहाई हनुमान जी, दुहाई हिङ्गलाज, दुहाई गरुण नारायण की । 

वीर धनञ्जय, दुहाई लोना चमाइच की।



विधि : 

 121 बार उक्त मन्त्र का जप करे। जप के बाद सात बार हवन करे । हवन-सामग्री-गाय का दूध, तुलसी-पत्ती, बेल-पत्र, पीपल की कोमल पत्ती, 5 लौंग, कपूर, घी, गुड़। आम की लकड़ी में हवन करे । इससे मन्त्र सिद्ध हो जायगा। सिद्ध हो जाने पर टोना टमानी, प्रेत-बाधा में 11 बार इसे पढ़कर फूंक मारे, तो ये सब दोष दूर होंगे । 11 बार जप करने से आत्म-रक्षा होती है।

रविवार, 24 जुलाई 2022

bandhiya niwaran- putra prapti shabar mantra

 पुत्र होने का अढ़या शाबर (वन्ध्या-निवारण) 

आज हम आपको एक बहुत ही दुर्लभ मत्र के बारे में बताने जा रहे है जो आजकल के समय में बांझ स्त्री के कोई संतान नहीं होती है। तो वह अपना बांझपन इस शाबर मंत्र के  प्रभाव से अपना बांझपन दुर कर संतान पैदा कर सकते। यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली व शक्तिशाली है इस बांझ शाबर मंत्र की विधि सहित देने जा रहा हूॅ। 

bandhiya niwaran- putra prapti shabar mantra
bandhiya niwaran- putra prapti shabar mantra



गुरू तात, गुरू मात, आगे पराता। 

सुख से अलगा बान । 

सोरा चौधरी मसान जगावे । 

दोहाय नयाना योगिनी के, सिद्ध गुरू के बन्दे पाँव । 

जाहि कामिनी के लागे, ताही कामिनी लागो। 

कामरू के विद्या (अमुकी) के कोइख लगा दे।

 

 

विधि : 

 रात्रि के समय दोनों कानों में सात बार उक्त मन्त्र पढ़ें। 'अमुकी' के स्थान पर वन्ध्या (बाँझ) का नाम लें । नागेश्वर का फूल और गाय का घी मिलाकर 'मासिक' के चौथे दिन से सात दिन तक मन्त्र द्वारा अभिमन्त्रित कर सायं-प्रातः सेवन करे। उससे बन्ध्यादोष दूर होगा और सन्तान होगी।

बुधवार, 20 जुलाई 2022

बहु उपयोगी शाबर-मन्त्र


 बहु उपयोगी शाबर-मन्त्र 

आज हम एक ऐसे बहु उपयोगी शाबर मंत्र के बारे में बता रहे जो एक मंत्र आपकी सारी समस्या का हल हो जायेगा यह मंत्र बहुत शक्तिशाली है  कोई व्यक्ति किसी व्याधि से पीड़ित हो, पीड़ा मारे छटपटा रहा हो यदि किसी घर में धन, सन्तान, पशु की वृद्धि न होती हो, कोई-न-कोई आधि-व्याधि लगी रहती हो आदि का प्रयोग व विधि सहित नीचे बता रखा है।  

बहु उपयोगी शाबर-मन्त्र
 बहु उपयोगी शाबर-मन्त्र

 

 

मंत्र

ॐ नमो आदेश गुरन को, ईश्वर वाचा। 

अजरी बजरी बाड़ा बज्जरी, मैं बज्जरी बाँधा दशौ दुवार छवा। 

और के धालों, तो पलट हनुमन्त बीर उसी को मारे । 

पहली चौकी गनपती, दूजी चौकी हनुमन्त, 

तीजी चौकी में भैरों, चौथी चौकी देह, रक्षा करन कों आवें श्रीनरसिंह देव जी। 

शब्द-साँचा, पिण्ड काँचा, चले मन्त्र ईश्वरी वाचा।


प्रयोग (1)

घर-बाहर, देश-परदेश, जङ्गल या श्मशान में, जहाँ कहीं भी रहें, इस मन्त्र को पढ़कर बैठे या रात में सो जाएँ, तो विषैले जीव, हिंसक जीव, वध करनेवाले, लूटनेवाले अथवा कोई आघात करनेवाले दूर ही खड़े रहेंगे, देह को स्पर्श नहीं कर सकेंगे। मन्त्र को पढ़ते हुए अपने चारों ओर रेखा खींच ले या जल छिड़क ले, तो 'सुरक्षा-कवच' बन जाता है

इस के बार अनेक प्रकार के मंत्रों की बुक के लिए यहां पर क्लिक करें यहां पर क्लिक करें
प्रयोग (2)

यदि कोई व्यक्ति किसी व्याधि से पीड़ित हो, पीड़ा मारे छटपटा रहा हो अथवा अज्ञात कारणों से उसका शरीर अकड़ने लगे, मूर्छा आ जाए, तो इस मन्त्र द्वारा झाड़ देने पर वह व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ, प्रसन्न हो जाता है।


प्रयोग (3)

यदि किसी घर में धन, सन्तान, पशु की वृद्धि न होती हो, कोई-न-कोई आधि-व्याधि लगी रहती हो और लोग उसे अशुभ मानकर छोड़ने के लिए तैयार हों, तो उस घर में जितने द्वार हों, उतने ही लोहे के कील और एक मुट्ठी उड़द की व्यवस्था करे। कीलों और उड़द के दानों को अलग-अलग उक्त मन्त्र द्वारा अभिमन्त्रित कर ले । फिर मन्त्र पढ़ते हुए सबसे भीतरी कमरे में प्रवेश करे और यही मन्त्र पढ़ते हुए उड़द के दाने फेंकते हुए कमरे के बाहर निकल आए तथा उसकी चौखट पर एक लोहे की कील इसी मन्त्र को पढ़ते हुए गाड़ दे।। इसी प्रकार क्रमशः प्रत्येक कमरे के भीतर जाकर उड़द फेंकते हुए बाहर आ उसकी चौखट पर कील गाड़ते हुए घर के बाहर आकर मुख्य द्वार में भी पूर्व-वत् कील ठोंक दे। आँगन और बरामदों में केवल उड़द के दाने बिखेरने चाहिए। मात्र इतनी क्रिया से घर के ग्रह-दोष सदा के लिए दूर हो जाते हैं।

सोमवार, 18 जुलाई 2022

Shivji ka ridhi sidhi mantra

 शिवजी का रिद्धि सिद्धि मंत्र

शिवजी की कृपा पाने के लिए अचूक मंत्र / shiv ji ka mantra. हमारे हिंदू धर्म में अगर कोई सबसे लोकप्रिय देवता है तो वह है भगवान भोलेनाथ. हर देवी देवताओं में भगवान शिव को सबसे ज्यादा कल्याणकारी देवता माना जाता है और ऐसा माना जाता है जो भी भक्त अपने सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा अर्चना करता है भगवान शिव स्वयं उसके सारे कष्ट हर लेते हैं और उसे हर प्रकार की सुख समृद्धि प्रदान करते हैं.

 एक बहुत ही प्रभावशाली शिवजी का मंत्र के बारे विशष जानकारी देते है जो मंत्र इस मत्र का जाप करने से आपके जिदंगी में एक नया मोड आयेगा और सारी परेशानियॉ व कठिनाई को दुर कर देगी और आपके जीवन में धन व आर्थिक स्थिति को सुधार देगा ओर धंधा या रोजगार या व्यपार के अनेक नया अपार मार्ग खुल देता है। इस मंत्र से रिद्धि और सिद्धि की कृपा होती जिसकी अनके प्रकार के कष्टों से मुक्ति होती है।

 

Shivji ka ridhi sidhi mantra
Shivji ka ridhi sidhi mantra



हमारे तमाम हिंदू ग्रंथ मैं इस बात का उल्लेख है कि जब जब इस ब्रह्मांड पर या ऋषि मुनि, देवी देवताओं और मनुष्य पर कभी भी कोई भी घोर संकट आया है तब-तब भगवान शिव ने उन तमाम कष्टों को विश के रूप में स्वयं में धारण किया है.
 



ऊँ नमो गुरूजी महाशिवाय देवो 

महेश्वर गौरी पुत्र गणेश रिद्धि सिद्धि देव 

माता अन्नपूर्णा खोलो ताला गणेश लावे 

रिद्धि सिद्धि मतवाला कुबेर खोलो 

धन के द्वार लक्ष्मी देवे बारम्बार पूजा देव 

ईश्वर महादेव गोरा पार्वती की दुहाई 

शब्द साचा पिण्ड काचा चल मंत्र तत्वदर्शी वाचा।

 

विधिः- सुबह ब्रम्ह समय में शिवजी के मंदिर में शिवलिंग पर पूजा करना पांच प्रकार की फल  और पंच मेवा और पंचाअमृत तथा गुगल की धूनी यह सभी सामग्री लेकर शिवलिंग पर जाना है और शिवलिंग की पूजा करने यह सभी अर्पण करके  फिर इस मंत्र का 108 बार पाठ करना और माला रूद्राक्ष की होनी चाहिए तथा इस मंत्र का प्रयोग  3 सोमवार लगातार करना है

रविवार, 10 अप्रैल 2022

Agori shiv janjira kat mantra

 अघोरी शिव जंजीरा काट मंत्र-Agori shiv janjira kat mantra

आप हम आपको अघोरी शिव का काट जंजीरा मंत्र के बारे में सम्पूर्ण मंत्र एंव उनके कार्य व प्रभाव तथा विधि सहित की जानकारी देने जा रहे है। अघोरी शिव जंजीरा मंत्र बडे से बडे तंत्र व मंत्र की काट की जा सकती है। अघोरी शिव जंजीरा मंत्र से बढकर कोई काट मंत्र नहीं है। यह एक स्वयं सिद्ध एवं पूर्ण परीक्षित मंत्र है। इस मंत्र से किसी प्रकारी चोकी तंत्र मंत्र आदि का काट किया जा सकता है। यह अघोरी शिव जंजीरा काट मंत्र एक बहुत की पाउरफुल मंत्र है। 


Agori shiv janjira kat mantra
Agori shiv janjira kat mantra


 अघोरी शिव जंजीरा काट मंत्र


ओम नमो आदेश गुरू को अघोरी रूप में शिव जी आए तेतीस कोटि देवता लाए देवता लाके क्या करें तंत्र काटे मंत्र काटे जंतर काटे बुरी विद्या काटे अच्छा विद्या काटे लगे लगाया को काटे भेज भजाय को काटे चौकी काटे बंधन काटे चौहद तंत्र काटे अपने को काटे पराए को काट हांडी काटे बाण काटे मोठ काटे चोट काटे जल काटे थल काटे धरती काटे आकाश काटे जहर काटे जूवर काटे लोहे का त्रिशूल अग्नि की धार काटने वाले कौन महादेवा अघोर रूपी चले मंत्र फूरे वाचा महादेव का शब्द साचा सत्य नाम आदेश बाबा गोरखनााि का तत्सम।


विधिः-


इस मंत्र को सिद्ध करने की कोई बाध्यता नही फिर भी कोई साधक मंत्र को सिद्ध करना चाहता है तो कोई शिव मंदिर जहां शिवलिंग स्थापित हो उस मंदिर में जाकर अपने साथ एक लोटा जल एंव पंच अमृत बना कर ले जाए ओर फिर मंदिर में जाकर इस मंत्र को 108 बार इस पंच अमृत में पढकर शिवलिंग कर अर्पित कर देवें । फिर इस मंत्र  किसी उपर मंत्र तंत्र चोकी हो तो उसको 5 निंबु एक-एक हाथ और एक-एक पैर और एक सिर पर देकर फिर इस मंत्र को 108 बार पढकर फिर उस निंबु को काट कर फेक देवें को हर प्रकार का काट हो जायेगा।

 

 
 
 

 

बुधवार, 6 अप्रैल 2022

bichhu ka jahar utarne ka mantr

 बिच्छू झाड़ने का मन्त्र 

हम आपको बिच्छू के जहर को उतारने वाले अलग-अलग प्रकार के मंत्रों के बारे में जानकारी देने वाले हैं, बिच्छू के काटने पर तो एक बार आदमी को बहुत ही तेज दर्द होता है कोई बिच्छू आदमी को काट लेता है तो उसके कांटे हुई जगह पर बहुत तेज दर्द होता है  bichhu katne ka mantr aur upay jane sabar mantr ka prayog  kaese kare
 
 
 
bichhu ka jahar utarne ka mantr
bichhu ka jahar utarne ka mantr


1-मंत्र

ॐ नमो सत्य नाम, आदेश गुरु को। वृश्चिक-दंश पीड़ा हरो, जहर उतारो। न उतारो, तो गुरु गोरखनाथ की आन। दुहाई काली कङ्कालनी की। दंशपीडा बन्य-बन्य। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। शब्द सांचा, पिण्ड काचा। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।


पहले उक्त मन्त्र को सिद्ध करे। बाद में जब देशयुक्त व्यक्ति अये, तब 21 बार उक्त मन्त्र जप कर झाड़े। दंश समाप्त होगी और जहर भी उतर आये।


2-मंत्र

ॐ सुमेर पर्वत, नोना चमारी। सोने राई, सोन के सुनारी। हुक बुक, बान बिआरी। धारिणी नला, कारी-कारी। समुद्र पार बहायो, दोहाई नोना चमारी की। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।। 

3-मंत्र

ॐ नमो गुरह गाय, परवत पर जाय। हरी दूब खाती फिरे, ताल-तलैया पानी पिए। गुरह गाय ने गोबर किया, जिसमें उपजे बिच्छू सात। काले, पीले, भूरे (घोले), लाल, रङ्ग-बिरङ्गे और हराल। उत्तर रे उतर जहर बिच्छू का जाया, नहिं (तो) गरुड जी उड़ के आया (नहिं गरुड़ उड़कर आया)। सत्य नाम, आदेश गुरु को। शब्द सांचा, पिण्ड काचा। स्फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।
 

 पहले मन्त्र सिद्ध करे। फिर उक्त मन्त्र से जल अभिमन्त्रित कर दंशयुक्त व्यक्ति को पिलाये। विष का प्रभाव नष्ट होगा।

दीपावली की रात में उक्त मन्त्र का 10 माला जप करे। इस प्रकार 1000 जप करने से मन्त्रसिद्धि होगी। बाद में दंशयुक्त व्यक्ति के 7 बार उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित जल पिलाये तो विष या जहर उतर जायेगा।
 

4-मंत्र

सुरहि कारी गाय, गाय की चमरी पूछी। तेकरे गोबर, बिछा बिअतोइ बिंछी। तोर के जाती, गौरा वर्ण अठारह जाती। छः कारी, छः पीअरी, छः भूमा-घारी, छः रत्न-पवारी, क्षः क्षः। कुटुं कुंदै छारि उतारी बिच्छी। हाडाहाड, पोर-पोर, कस मार। लील कण्ठ गर मोर, महादेव की दोहाई। गौरापार्वती की दुहाई। अनी-तबे हरि शण्डार, मन छाई उतरहि बीछी। हनुमन्त आज्ञा, दुहाई हनुमन्त की। 

5-मंत्र

 पर्वत ऊपर सुरहि गाई, तेकरे गोबरे बिछी बिआई। छः कारी, छः गोरी। छः का जोता उतारि कै, बिछा बिछिठा। वहि आ आठ-गाठि, नव पारे बीछी करे अजोइ बलि चल चलाई कर वाइ। ईश्वर महादेव की दुहाई। जहाँ गुरु के पाँव सरके, तहँहि गुरु के कुश कजुरी। तहहि विष्णु पुरी निर्मा जाइके। दहाई महादेव गुरु के। ठावहिं ठाव, बीछी पार्वती।

6-मंत्र

 बीछी-बीछी तोर के जाति? छः कारी, छः पीयरी, छः परवारी। बीछी पपाना पस स्वपाउ, तोरि विषि तइमे ना हिठाउ। ऊपर जा तिगछै पाऊ, शिव वचन शिव नारी। हनुमान के आन, महादेव कै आन, गोरा-पार्वती के आन। नोना चमारिन के उतरि आउ, उतरि आउ।

7-मंत्र

 ॐ नमो समुद्र ! समुद्र में कमल, कमल में विषहर बिछू उपजावे। कहूँ तेरी जाति-गरुड कहे मेरी अठारह जाति। छः कारी छः काबरी, छः । कूँ वान। उतरे रे उतर, नहीं तो गरुड पङ्घ हङ्कारु आन। सर्वत्र विष न मिलई, उतरे रे बिछू ! उतर। गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति, फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।


सबसे पहले शाबर-विधि से मन्त्र को सिद्ध करे। बाद में मन्त्र को पढ़ते हुए बिच्छु द्वारा मारे गये डङ्क के स्थान के ऊपर के भाग पर अपना हाथ फिराये।

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