शाबर मंत्र, तंत्र यंत्र साधना, गुरु गोरखनाथ परंपरा के प्राचीन सिद्ध मंत्र, वशीकरण, सुरक्षा मंत्र, बाधा निवारण मंत्र और शक्तिशाली लोकपरंपरा आधारित साधनाओं का संपूर्ण ज्ञान। यहाँ आप सरल मंत्र विधि, प्रयोग, तांत्रिक माध्यम और आध्यात्मिक जानकारी आसानी से सीख सकते हैं।

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मंगलवार, 18 नवंबर 2025

Shabar Mantra for Wealth & Business in Hindi

धन-लाभ और व्यापार उन्नति हेतु शक्तिशाली शाबर मंत्र | Shabar Mantra for Wealth & Business in Hindi

🔱 परिचय

व्यापार, नौकरी या धन से जुड़ी रुकावटें जीवन में कई बार तनाव पैदा कर देती हैं।
शाबर मंत्र ऐसे मंत्र हैं जो तेज प्रभाव, सरल भाषा और सिद्ध शक्ति के कारण धन-संबंधी समस्याओं में भी सहायता देने के लिए प्रसिद्ध हैं।

इन मंत्रों का उद्देश्य है—
✔ रुकावट हटाना
✔ भाग्य प्रबल करना
✔ व्यापार में वृद्धि
✔ आर्थिक स्थिरता

इनका उपयोग सकारात्मक और शुभ उद्देश्य से ही करना चाहिए।

धन-लाभ और व्यापार उन्नति के लिए शाबर मंत्र साधना का प्रतीक चित्र
धन-लाभ और व्यापार उन्नति के लिए शाबर मंत्र साधना का प्रतीक चित्र

 


🕉 धन शाबर मंत्र क्यों प्रभावी माने जाते हैं?

• ये मंत्र कमान्ड ऊर्जा (command vibration) पर आधारित होते हैं।
• सामान्य संस्कृत मंत्रों की तुलना में लोकभाषा के कारण आसानी से समझ में आते हैं।
• ध्वनि तरंगें साधक की मानसिकता और ऊर्जा-चक्रों को सक्रिय करती हैं।
• यह साधक को प्रेरणा, अवसर और सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।


💰 1. धन प्राप्ति का प्रसिद्ध शाबर मंत्र

यह मंत्र धन-आकर्षण, रुका हुआ पैसा वापस मिलने और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रयोग होता है।

🌟 मंत्र:

“ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी मातो नमः।
गुरु गोरखनाथ जी की दुहाई,
मेरा धनलाभ शीघ्र करो।”

जाप विधि:

  • गुरुवार या शुक्रवार से शुरू करें

  • पीले वस्त्र पहनें

  • दीपक में घी जलाएँ

  • 5 माला प्रतिदिन (21 दिन)

  • साधना पूर्ण होने पर कुमकुम अर्पित करें


📈 2. व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र (दुकान/ऑफिस के लिए)

यह मंत्र व्यापार में ग्राहकों की आवक, बिक्री में वृद्धि और रुकावट दूर करने के लिए किया जाता है।

🌟 मंत्र:

“जय बाला गुरु गोरखनाथ।
मेरी दुकान-व्यापार में बरकत कर।
आवक बढ़े, लाभ बढ़े, संकट कटे।”

विधि:

  • रोज सुबह दुकान खोलने से पहले 11 बार पढ़ें

  • दुकान/काउंटर पर सिंदूर/केसर का तिलक लगाएँ

  • हफ्ते में एक बार कपूर-लोबान से धूप दें

इस मंत्र से व्यापार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।


🪙 3. रुका हुआ पैसा (देना–लेना) वापस लाने का शाबर मंत्र

कभी-कभी पैसा अटक जाता है या लोग लौटाते नहीं हैं।
यह मंत्र बिना किसी को नुकसान पहुँचाए आपकी धन-वापसी के लिए सहायक माना जाता है।

🌟 मंत्र:

“ॐ नमः आदिनाथाय।
गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
जिसके पास मेरा धन रुका है,
वह स्वयं मन से लौटा दे।”

विधि:

• मंगलवार/शनिवार रात को 108 बार जप
• काला तिल अपने पास रखें
• 11 दिन तक लगातार जप करें


🪔 4. घर में धन की बरकत हेतु शाबर मंत्र

यह मंत्र घर में लक्ष्मी स्थिर रखने, अचानक खर्चे रोकने और समृद्धि बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है।

🌟 मंत्र:

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
गुरु गोरखनाथ रक्षा करो,
घर में धन-धान्य बढ़ाओ।”

विधि:

• शुक्रवार की रात 21 लाल मोमबत्तियाँ जलाएँ
• प्रतिदिन 108 बार मंत्र जप
• घर में शंख/घंटी ध्वनि करें


शाबर मंत्र करते समय महत्वपूर्ण नियम

✔ मंत्र हमेशा सकारात्मक उद्देश्य से करें
✔ शराब, मांस, तामसिक भोजन से बचें
✔ जप के समय मन शांत रखें
✔ लाल/पीला आसन सर्वोत्तम
✔ साधना के बीच गुस्सा, झूठ, अपवित्रता से दूर रहें
✔ किसी भी मंत्र से गलत काम कराने का प्रयास न करें


🏵 परिणाम (Effects) कब मिलते हैं?

• साधक की नीयत, नियम और मनोस्थिति पर निर्भर
• सामान्यतः 7 से 21 दिनों में सकारात्मक परिवर्तन दिखना शुरू हो जाता है
• कभी-कभी तुरंत असर भी दिखाई देता है—
जैसे ग्राहक का बढ़ना, रुका हुआ पैसा चलना, नए अवसर प्रकट होना आदि


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. क्या ये मंत्र सुरक्षित हैं?

हाँ, यदि सकारात्मक उद्देश्य से किए जाएँ।

Q2. क्या बिना दीक्षा शाबर मंत्र कर सकते हैं?

साधारण और सार्वजनिक मंत्र कर सकते हैं, लेकिन कूट मंत्र हेतु गुरु आवश्यक है।

Q3. क्या मंत्र से धन अचानक मिलता है?

मंत्र अवसर खोलते हैं — भाग्य, ऊर्जा और परिस्थितियाँ साधक के पक्ष में आने लगती हैं।


शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

शाबर मंत्र क्या है? सम्पूर्ण जानकारी | Shabar Mantra in Hindi

 🌺 परिचय : शाबर मंत्र क्या हैं?

शाबर मंत्र भारत की अत्यंत प्राचीन लोकपरंपराओं से उत्पन्न मंत्र हैं, जिन्हें नाथ योगियों, सिद्धों, औघड़ों और गुरु गोरखनाथ जी ने जनसाधारण की भाषा में रचा था।
इन मंत्रों की शक्ति इतनी सशक्त मानी जाती है कि इनके लिए कठिन संस्कार या उच्चारण शुद्धि आवश्यक नहीं होती।

शाबर मंत्र सीधे देवी-देवताओं, ग्राम देवताओं और लोक-शक्ति से जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें "तुरंत फलदायी" भी कहा गया है।

प्राचीन लोकपरंपराओं से जुड़ा शक्तिशाली शाबर मंत्र ज्ञान

 


🕉 शाबर मंत्र का उद्गम

शाबर मंत्रों को सबसे अधिक प्रसिद्धि नाथ संप्रदाय से मिली।
गुरु गोरखनाथ, मत्स्येंद्रनाथ और सिद्धों ने इन्हें

  • लोकभाषा

  • बोलचाल की शैली

  • देसी प्रतीकों
    का प्रयोग करके रचा, ताकि हर व्यक्ति इन्हें सरलता से समझकर जप सके।


🔥 शाबर मंत्र की विशेषताएँ

  • कठिन संस्कृत के मंत्रों की तरह नियमबद्ध बाध्यता नहीं

  • साधारण भाषा, पर शक्तिशाली प्रभाव

  • तुरंत फल देने वाले मंत्र

  • सुरक्षा, सफलता, संकट-निवारण आदि में उपयोग

  • जप के लिए कोई विशेष स्थान/समय आवश्यक नहीं (फिर भी प्रातः/रात्रि श्रेष्ठ)


🔱 प्राचीन लोकपरंपरा से जुड़ा शक्तिशाली शाबर मंत्र

नीचे एक लोकपरंपरा आधारित प्रसिद्ध शक्ति व संरक्षण का शाबर मंत्र दिया जा रहा है:

🕉 शक्तिशाली शाबर मंत्र

 
ॐ नमो आदेश गुरुजी का।
गुरु गोरखनाथ जी की दुहाई।
सर्व बाधा दूर होय,
संकट मिटे, विपत्ति टले।
जय गुरु गोरखनाथ।


📌 मंत्र जप विधि

  1. सुबह या रात शांत स्थान पर बैठें।

  2. सामने दीपक या अगरबत्ती जलाएँ।

  3. किसी भी रुद्राक्ष/चंदन की माला का उपयोग करें।

  4. 1 माला (108 बार) रोज़ जप करें।

  5. जप के बाद गुरु गोरखनाथ जी को प्रणाम करें।


🌟 मनोकामना सिद्धि के लिए विशेष उपयोग

  • यदि जीवन में बाधाएँ, रुकावटें या लगातार परेशानी हो

  • नौकरी, व्यवसाय या धन-संकट हो

  • नकारात्मक ऊर्जा या भय हो

यह शाबर मंत्र बहुत तेज़ काम करता है क्योंकि यह लोक-ऊर्जा व गुरु कृपा से जुड़ा है।


⚠ महत्वपूर्ण

यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है।
आपकी साइट के लिए आवश्यक अस्वीकरण—

“यह जानकारी केवल आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए है। इसका कोई दुरुपयोग न करें।”


✨ निष्कर्ष

शाबर मंत्र भारत की प्राचीन लोक-परंपरा का अनमोल खजाना हैं।
इनका जप सरल, प्रभाव तेज़ और फलदायी माना गया है।
यदि इसे श्रद्धा व नियम से किया जाए तो व्यक्ति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव कर सकता है।

रविवार, 10 मार्च 2024

अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना

अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना 

 बहुत दिनों से काफी साधकों ने संपर्क किया देश की विभिन्न जगहों से बहुत लोगों की मांग में ऐसी साधना मांगी गई जो प्रेत योनि में महत्वपूर्ण वा अधिक समर्थ  शक्ति की हो  कोई दो राय नहीं बरहम राक्षस प्रेत योनि में सर्वाधिक सक्षम शक्ति का नाम है इसको सिद्ध करने वाला व्यक्ति कोई भी कार्य करने में सक्षम होता है यह योनि बहुत ही जल्दी प्रसन्न वा क्रोधित भी होती है । हर तंत्र साधक की इच्छा होती है यह साधना सिद्ध करने की । साधक कोशिश भी करते हैं बहुतों ने सिद्ध की बहुत करना चाहते हैं अभी भी और बहुत लोगों ने इसके चक्कर में अपना बहुत कुछ खोया भी है ।।

अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना
अति भयंकर ब्रह्मरक्षस प्रत्यक्षीकरण साधना 


विशेष ध्यान 

 यह साधना मजबूत इच्छा शक्ति वाले ही करें और खुद की ही जिम्मेदारी से करें । यह योनि बहुत शक्तिशाली है यह कैसा भी रूप ले सकती है सामने आकर डरा सकती है विभन्न प्रकार के छलावे भी यह कर सकते हैं। अगर आप साफ उद्देश्य वा सही नियमों से कोशिश करते हैं तो हो सकता है बिना डरावने अनुभव के भी यह सिद्ध हो जाए ।
पहले थोड़ा जान लें इनका निवास पुराने पीपल के पेड़ों में होता है मंदिर में या शमशान में ऐसे पीपल का होना चाहिए । आकड़े में भी माना गया है पर अधिकतर पीपल का वृक्ष ही है ।


सामग्री 

मिठाई पांच प्रकार की 
बताशे 
5 पान सुपारी
कपूर 5 लौंग के जोड़े 
कुशा का आसन
शराब की बोतल अच्छी
बकरे का मांस भुना हुआ
वस्त्र काले 
दिशा दक्षिण
दिन शुक्रवार 
माला रुद्राक्ष या स्फटिक 

बहुत अच्छा होगा ऐसा पीपल ढूंढे जो शमशान में हो 
1/नियम में धरती शयन है 
2/स्त्री के संपर्क में नहीं आना है।
3/ एक समय ही भोजन करना है ।
4/ अपवित्र रहना है ।
5/ अकेले ही रहना है साधना के दौरान 
6/ जब तक साधना सिद्ध ना हो जाए किसी से कोई बात नहीं करनी 
7/ सिद्ध होने पर कभी भी किसी से कोई जिक्र नहीं करना


मंत्र 
ओम नमो आदेश गुरु जी को सत नमो आदेश
ओम गुरुजी आदेश करो अपना ब्राह्मण कुल में
पैदा हुआ सिद्ध हुआ ज्ञानी हुआ राक्षस गुणी कार्य
किया वो बना सौ प्रेतो का राजा जो अपने को
कहलाए ब्रह्मराक्षस मै रमाऊ उसकी धूनी पचरंगी
भोग लगाओ आदेश लगाओ अपने गुरु का
ब्रह्मराक्षस तोये बुलाओ प्रत्यक्ष होकर मेरे समक्ष
खड़ा हो इतने पर भी मेरे बुलाए मेरे गुरु उस्ताद
के बुलाए हाजिर होकर मेरा अमुक काम ना करें
तो तू अपनी बहन भांजी से हराम करें तू अपने ही
गुरु का खून पीये मेरे वाचे को कुवाचा करें तो तुझे
देवराज इंद्र की आन लगे तुझे ब्रह्मदेव कि आन
देवों के देव महादेव की आन फुरे मंत्र ईश्वरी वाचा
सत नमो आदेश गुरु का



नोट= 
भूल से भी कोई आजमाएं ना जो करने का मन बनाए हुए साधक हैं वही करें और अपने गुरु से राय मशवरा भी कर लें । पर करते समय कब तुम कर रहे हो इसका पता किसी को भी नहीं होना चाहिए ।




शुक्रवार, 3 मार्च 2023

lon chamrin shabar mantra shadhana

लोना चमारी शाबर मंत्र साधना 

 शाबर मंत्र द्वारा लोना चमारी को सिद्ध करने से साधक भूत-प्रेत, जादूटोना, डाकिनी-शाकिनी, जिन्न बाधा, तांत्रिक माया जाल, काला जादू व रक्षा करने हेतु, इन सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करता है।

लोना चमारी शाबर मंत्र साधना 



लोना चमारी शाबर मंत्र 


ॐ नमो आदेश गुरु को


लूना चमारीन जगत की बिजुरी मोती हेल चमके


जो "अमुक" पिंड में जान करे विजान करे तो उस रंडी पे फिरे दुहाई तख़्त सुलेमान पैगंबर की फिरे


मेरी भक्ति


गुरु की शक्ति


फुरो मंत्र इश्वरोवाचा ||


मंत्र साधना विधि :


संध्या के समय पूर्व दिशा की तरफ मुख करके आसन बिछाकर बैठ जाये। सामने एक तेल का दीपक जलाये | साधना के पहले दिन दो लडूड, एक मीठा पान, दो लौंग, दो इलाइची छोटी और सात प्रकार की मिठाई अपने सामने रखे और अगले दिन किसी उजाड़ स्थान पर जाकर फेंक आयें। अब सबसे पहले गुरु पूजन करें फिर गणेश जी का पूजन करें। ऐसा करने के उपरांत रक्षा मंत्र द्वारा अपने चारों तरफ सुरक्षा चक्र बना ले। अब उपरोक्त शाबर मंत्र के अपने सामर्थ्य अनुसार जप करें। प्रतिदिन समान मात्रा में जप करें, किसी दिन कम या किसी दिन अधिक ऐसा बिल्कुल न करें। साधना को 21 दिन तक लगातार करें। 21वें दिन फिर से साधना में दो लडूड, एक मीठा पान, दो लौंग, दो इलाइची छोटी और सात प्रकार की मिठाई अपने सामने रखे और इससे अगले दिन किसी उजाड़ स्थान में फेंक आयें -


बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

Kal bhairav ka sarwarth sadhak shabar mantra

 सर्वार्थ साधक मन्त्र 


ॐ अस्य श्री बटुक- भैरव-स्तोत्रस्य सप्त-ऋषिः ऋषय, मातृका-छन्दः श्री बटुक- भैरवो देवता ममेप्सितसिद्धयर्थं जपे विनियोगः। ॐकाल-भैरों, बटुक- भैरों भूत- भैरों। महा- भैरव महा- भय विनाशनं देवता सर्व-सिद्धिर्भवेत्। शोक-दुःखक्षय-करं निरंजनं, निराकारं नारायणं, भक्ति-पूर्णं त्वं महेशं। सर्व-काम-सिद्धिर्भवेत्। काल-भैरव, भूषण-वाहनं काल-हन्तारूपं च, भैरव गुनी ! महात्मनः- योगिनां महादेवस्वरूपं। सर्वं सिद्धयेत्। ॐकाल-भैरों, बटुक-भैरों भूत- भैरों! महा- भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ त्वं ज्ञानं, त्वं ध्यानं, त्वं योगं, त्वं तत्त्वं, त्वं बीजं, महात्मानं त्वं शक्तिः, शक्ति-धारणं त्वं महादेव-स्वरूपं। सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल-भैरो, बटुकभैरो, भूत- भैरो। महा-भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव! त्वं नागेश्वरं, नाग-हारं च त्वं, वन्दे परमेश्वरं। ब्रह्म-ज्ञानं, ब्रह्म-ध्यानं। ब्रह्म-योगं ब्रह्म-तत्वं, ब्रह्म-बीजं महात्मनः। ॐ काल- भैरव, बटुक-भैरव, भूत- भैरव ! महा- भैरव, महा- भूतविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिभवेत्।।

Kal bhairav ka sarwarth sadhak shabar mantra
 Kal bhairav ka sarwarth sadhak shabar mantra


त्रिशूल-चक्र-गदा-पाणिं शूल-पाणि पिनाक-धृक्। ॐ काल-भैरो, बटुकभैरो भूत- भैरो! महा- भैरव। महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव ! त्वं विना गन्धं विना धूपं, विना दीपं, सर्व-शत्रुविनाशनं। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। विभूति- भूति-नाशाय, दुष्ट-क्षय-कारकं महा- भैरवे नमः। सर्व-दुष्ट-विनाशनं सेवकं सर्वसिद्धिं कुरु। ॐकाल- भैरो बटुक-भैरो, भूत-भरो! महाभैरव महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव! त्वं महा-ज्ञानी, महा- ध्यानी महा-योगी, महा-बली, तपेश्वर! देहि मे सिद्धिं सर्वं। त्वं भैरवं भीम- नादं च नादनम्। ॐ कालभैरो, बटुक- भैरो, भूत- भैरो ! महा- भैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिभवेत्।। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं। अमुकं मारय- मारय उच्चाटय-उच्चाटय, मोहयमोहय वशं कुरु-गुरु। सर्वार्थकस्य सिद्धिरूपं त्वं महा-काल! कालभक्षणं महादेव स्वरूपं त्वं। सर्वं सिद्धयेत् ! ॐ काल-भैरो, बटुक- भैरो भूतभैरो! महा-भैरव, महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ कालभैरव ! त्वं गोविन्द, गोकुला नन्द। गोपालं, गोवर्धनं धारणं त्वं। वन्दे परमेश्वरं। नारायणं नमस्कृत्य, त्वं धाम-शिव-रूपं च। साधकं सर्वं सिद्धयेत्। ॐ काल- भैरो, बटुक- भैरो, भूतभैरो! महा- भैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। 

ॐ कालभैरव ! त्वं राम-लक्ष्मणं, त्वं श्रीपतिसुन्दरं, त्वं गरुड़वाहनं, त्वं शत्रु-हन्ता च। त्वं यमस्य रूपम्। सर्वकार्यसिद्धिं कुरु। ॐ कालभैरव, बटुकभैरो, भूतभैरव! महा- भैरव, महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ कालभैरव! त्वं ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरं त्वं जगत् कारणं, सृष्टि-स्थितिसंहार-कारकं रक्त-बीजं, महा-सैन्यं, महा-विद्या, महा-भयविनाशनम्। ॐ कालभैरो, बटुकभैरो, भूतभैरो! महा- भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ कालभैरव। त्वं आहार मद्य, मांसं च, सर्व-दुष्टविनाशनं, साधकं सर्वसिद्धिप्रदा।। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अघोर-अघोर महाअघोर सर्व-अघोर भैरव काल! ॐ कालभैरो, बटुक-भैरो, भूत-भैरो ! महा-भैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ॐ आं क्लीं क्लीं क्ली। ॐ आं क्रीं क्रीं क्रीं। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं, 5 5 5। क्रू क्रू क्रू। मोहन ! सर्वसिद्धिं कुरु-कुरु। ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं। अमुकं उच्चाटय-उच्चाटय। मारय-मारय। धूं, में प्रे, खं खं,दुष्टान् हन हन । अमुकं फट् स्वाहा । ॐ काल भैरो। बटुक-भैरो, भूत भैरो ! महा भैरव महा भय विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् ।।

ॐ बटुक-बटुक योगं च बटुक नाथ महेश्वरः । बटुकं वट वृक्षै बटुकं प्रत्यक्षं सिद्धयेत्। ॐ काल भैरो, बटुक-भैरो भूत- भैरो ! विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् । महा भैरव महाभय ॐ काल भैरव, श्मशान भैरव, काल रूप काल भैरव ! मेरो वैरी तेरो आहार रे । काढ़ि करेजा चखन करो कट-कट । ॐ काल भैरो, बटुकभैरो, भूत भैरो । महा भैरव महाभय विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ नमों हंकारीं वीर ज्वालामुखी ! तूं दुष्टन बध करो। बिना अपराध जो मोहिं सतावे, तेकर करेजा छिदि परै मुख वाट लोहू आवे । को जाने चन्द्र, सूर्य जाने की आदि पुरुष जाने, कामरूप कामाक्षा देवी । त्रिवाच्या सत्य फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॐ काल भैरो, बटुक भैरो भूतभैरो । महा भैरव महा भयविनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् ।।

ॐ काल भैरव ! त्वं डाकिनी शाकिनी, भूत-पिशाचश्च । सर्व- दुष्टनिवारणं कुरु कुरु, साधकानां रक्ष रक्ष । देहि मे हृदये सर्वसिद्धिम्। त्व भैरव - भैरवीभ्यो, त्वं महा भय विनाशनं कुरु । ॐ काल भैरव, बटुकभैरो, भूत- भैरो! महा भैरव महाभय विनाशनं देवता । सर्वसिद्धिर्भवेत् । ॐ आं ह्रीं । पच्छिम दिशा में सोने का मठ, सोने का किवाड़, सोने का ताला, सोने की कुंजी, सोने का घण्टा, सोने की साँकुली। पहली साँकुली अठारह कुल - नाग के बाँधों। दूसरी साँकुली अठारह कुल - जाति के बाँधों। तीसरी साँकुली वैरि- दुष्टन के बाँधों। चौथी साँकुली डाकिनीशाकिनी के बाँधों। पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत के बाँधों। जरती अगिन बाँधों, जरता मसान बाँधों। जल बाँधों, थल बाँधों, बाँधों अम्मर ताई । जहाँ तहाँ जाई । जेहि बाँधि मगावों, तेहि का बाँधि लाओ। वाचा चूकै, उमा सूखै। श्री बावन वीर ले जाये, सात समुन्दर तीर । त्रिवाचा फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा । ॐ काल- भैरो, बटुक-भैरो, भूत- भैरो । महा-भैरव, महाभय विनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत् । ।

ॐ आं ह्रीं । उत्तर दिशा में रूपे का मठ । रूपे का किवार, रूपे का ताला, रूपे की कुंजी रूपे का घण्टा, रूपे की साँकुली । पहिलि साँकुली अठारह कुल नाग बाँधों। दूसरी साँकुली अठारह कुल जाति को बाँधों। तीसरी साँकुली बैरि- दुश्मन को बाँधों। चौथी साँकुली डाकिनी शाकिनी को बाँधों। पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत को बाँधों? जलत अगिन बाँधों, जलत मसान बाँधों। जल बाँधों, थल बाँधों, बाँधों अम्मर ताई। जहाँ भेजें, तहाँ जाई। जेहिं बाँधि मँगावों तेहि का बाँधि लाओ, वाचा चूकै, उमा सूखें। श्री बावन वीर ले जाय, समुन्दर तीर, त्रिवाचा। फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा। ॐ काल-भैरो, बटुक-भैरो, भूत-भरो! महा- भैरव। महाभयविनाशनं देवता, सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ आं ह्रीं। पूरब दिशा में तामे का मठ, तामे का किवार, तामे का ताला, तामे की कुंजी, तामे का घण्टा, तामे की साँकुली। पहली साँकुली अठारह कुल-नाग को बाँधूं, दूसरी साँकुली अठारह कुल-जाति को बाँधूं, तीसरी साँकुली वैरि-दुष्टन को बाँधू। चौथी साँकुली डाकिनीशाकिनी को बाँधू, पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत को बाँधूं। जलत अगिन बाँचूं, प्रेत को बाँधूं। जलत अगिन बाँधू जलत मसान बाँचूँ। जल बाँधों थल बाँधों, बाँधों अम्मर ताई। जहाँ भेनँ, तहाँ जाई। जेहिं बाँधि मगावों। वाचा चूके, उमा सूखै श्री बावन वीर ले जाये सात समुन्दर तीर। त्रिवाचा फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा। ॐ काल- भैरो, बटुक-भैरो, भूत- भैरव। महाभैरव महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ आं ह्रीं। दक्षिण दिशा में अस्थि का मठ, अस्थि का किवार, अस्थि का ताला, अस्थि की कुंजी, अस्थि का घण्टा, अस्थि की साँकुली। पहली साँकुली अठारह कुल-नाग को बाँधों, दूसरी साँकुली अठारह कुल जाति को बाँधों, तीसरी साँकुली वैरि-दुष्टन को बाँधों, चौधी साँकुली डाकिनीशाकिनी को बाँधों। पाँचवीं साँकुली भूत-प्रेत को बाँधों। जलत अगिन बाँधों, जलत मसान बाँधों, जल बाँधों, थल बाँधों, बाँधों अम्मतरताई। जहाँ भेजूं तहाँ जाई। जेहि बाँधि मगावों, तेहि का बाँधि लाओ। वाचा चूकै, उमा सूखै श्री बावन वीर ले जाय सात समन्दर तीर। त्रिवाचा फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ॐ काल- भैरो, बटुक- भैरो, भूत- भैरो। महा- भैरव महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल- भैरव! त्वं आकाशं, त्वं पातालं। त्वं मृत्यु-लोकं। चतुर्भुजं, चतुर्मुखं। चतुर्बाहुँ, शत्रु-हन्ता च त्वं भैरव ! भक्ति पूर्ण कलेवरम्। ॐ काल- भैरो, बटुक- भैरो भूत- भैरो ! महा- भैरो महा- भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।।

ॐ काल- भैरव त्वं। वाचा चूकै उमा सूखै, दुश्मन मरे अपने घर में। दुहाई काल-भैरव की। जो मोर वचन झूठा होय, तो ब्रह्मा के कपाल फूटै शिव जी के तीनों नेत्र फटै, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ॐ काल-भैरव बटुक-भैरव, भूत-भैरव ! महा- भैरव, महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। ॐ काल-भैरव! त्वं ज्ञानी, त्वं ध्यानी त्वं योगी, त्वं जंगम स्थावरं त्वं सेवित सर्व-काम-सिद्धिभवेत्। ॐ काल-भैरो, बटुक- भैरो, भूत-भैरो! महा-भैरव महा-भयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल-भैरव! तुम जहाँ जाहु। जहाँ दुश्मन बैठ होय, तो बैठे को मारो। चलत होय, तो चलते को मारो। सोवत होय, तो सोते को मारो। पूजा करत होय, तो पूजा में मारो। जहाँ होय, तहाँ मारो। व्याघ्र लै भैरव, दुष्ट को भक्षौ। सर्प ले भैरव! दुष्ट को उँसो। खड्ग से मारो, भैरव ! दुष्ट को। शिर गिरैवान से मारो, दुष्टन करेजा फटै। त्रिशूल से मारो, शत्रु छिदि परै मुख वाट लोहू आवे। को जाने? चन्द्र सूरज जाने की आदि-पुरुष जाने। काम-रूप कामाक्षा देवी। त्रिवाचा सत्य फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा। ॐ काल-भैरो, बटुक-भैरो, भूत-भैरो! महा-भैरव महा-भयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल- भैरव ! त्वं वन्दे परमेश्वरं ब्रह्म-रूपं, प्रसन्नो भव। गुनि, महात्मानां महादेवस्वरूपं सर्वसिद्धिर्भवेत्। ॐ काल-भैरव ! त्वं भूतस्य भूत-नाथश्च। भूतात्मा भूतभावनः। त्वं भैरव, सर्व-सिद्धिं कुरु-कुरु। ॐकाल-भैरो बटुक-भैरो, भूत-भैरो। महा- भैरव महाभयविनाशनं देवता। सर्वसिद्धिर्भवेत्।। - 

    इस जंजीरे की सिद्धि के लिए किसी पर्वकाल में या ग्रहणकाल में श्री भैरव जी विषयक सभी नियमों का पालन करते हुए जप व हवन करें तथा इसका नित्य प्रतिदिन एक बार जप करने से साधक की सभी मनोकामनाएं भैरवकृपा से पूरी होती हैं।



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