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गुरुवार, 12 मार्च 2020

Kubera Mantra

कुबेर भाण्डार (ऋद्धि-सिद्धि) गायत्री


Kubera Mantra
Kubera Mantra

ॐ गुरु जी! ॐ सोहं - आकाश 'डिम्बी', पाताल कोठी, धर्ती का चुलही करूँ,
 आकाश का दीया, नवनाथ, 
चौरासी सिद्धों ने बैठकर भण्डार किया। 
चढ़े 'डिब्बी', उतरे ऋद्धि - सिद्धि । 
'काली - पीली' शिर जटा, माई पार्वती का उपदेश ! 
शिव - मुख प्रावे, शक्ति-मुख जावे । 
शक्ति मुख आवे, शिव-मुख जावे ।
 हात खङ्ग, 'तंत' की माला, जाप जपे श्री सुरिया बाला । 
ऋद्धि पूरे हर, घृत पूरे गणेश, 
अलील पूरे ब्रह्मा, माया पूरे महा-काली, 
हीरा पूरे हिङ्गलाज, नव-खण्ड में जोत जगाई ! 
ऋद्धि लाओ, भाण्डारी भाई ! ऋद्धि खंटे, सदा-शिव का जड़ाव टे । 
ऋद्धि खूटे, माता सीता सतवन्ती का सत्य छूटे । 
ऋद्धि खूटे, पार्वतो का कमल-कङ्गन टूटे । 
ऋद्धि खूटे, मान धान का टूटे । चन्द्र-सूर्य दो देव साखी । 
इतना कुबेर-भाण्डारी गायत्री-जाप सम्पूर्ण भया-नाथ जी आदेश, आदेश !

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